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एक बार फिर बीजेपी के बागी बचदा के हाथ में चाबुक

Thu, 27 Mar 2014 12:23 PM IST
शमशेर सिंह नेगी/ अमर उजाला, हल्द्वानी
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नैनीताल सीट में टिकट को लेकर भाजपा के भीतर जो असंतोष उबल रहा है, ठीक ऐसा ही घमासान 2008 में भी मचा था।
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मुखिया पद से हटाने के लिए विरोधियों लगाया था जोर
उनके विरोधियों ने पूरा जोर लगाया था उन्हें संगठन के मुखिया पद से हटाने के लिए। यहां तक कि हाईकमान को गढ़वाल के एक वरिष्ठ नेता का नाम प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए सौंप दिया गया था।

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आज भी वही स्थिति है लेकिन विरोधी खेमे के रथ में इस वक्त बचदा सवार हैं। पांच साल पुराने विरोध की टीस रावत अभी भूले नहीं हैं और इसीलिए 9 मार्च को सारे पदों से इस्तीफा देने के बाद अब वह 27 मार्च को दिल्ली कूच की तैयारी में हैं।
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बचदा ने यह भी ऐलान कर दिया है कि मैं सिर्फ आज की नहीं, बल्कि उत्तराखंड में अपने राजनीतिक कैरियर में हुए विरोधों को भी हाईकमान के सामने रखूंगा।

अभी जोर नहीं पकड़ पाया चुनाव प्रचार
अपने स्टैंड पर कायम रावत ने भाजपा प्रत्याशी भगत सिंह कोश्यारी की राहें भी मुश्किल कर दी हैं। इस असंतोष से पार्टी का चुनाव प्रचार भी अभी जोर नहीं पकड़ पाया है।

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भगतदा पिछले एक हफ्ते से इस सीट पर बगैर वरिष्ठ नेताओं को साथ में लिए प्रचार कर रहे हैं। जीवन का एक लंबा समय भाजपा को देने और उत्तराखंड में पार्टी की बुनियाद को मजबूत करने वाले इन दो दिग्गजों के बीच असंतोष की ‘तूफानी लहर’ 2008 में भी आई थी।

रावत तब पूर्व सीएम भुवन चंद्र खंडूड़ी के खास माने जाते थे। उनके पास प्रदेश अध्यक्ष का पद भी था। नेतृत्व परिवर्तन के लिए 2007 में सरकार बनने के बाद से जोर आजमाइश करने वाले भाजपा के एक खेमे ने दो शर्तें और रखी थी।

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एक, डिप्टी सीएम बनाया जाए और दूसरा, प्रदेश अध्यक्ष रावत को पद से हटाया जाए। बचदा को यहां तक कि कमजोर अध्यक्ष भी बताया गया। हालांकि हाईकमान ने ऐसा नहीं किया और रावत लोकसभा चुनाव लड़ने तक अध्यक्ष पद पर बने रहे।

उसके बाद उन्हें पार्टी ने टिकट दिया तो तब भी असंतोष थमा नहीं। नैनीताल सीट भाजपा को करीब 88 हजार वोटों से गंवानी पड़ी थी।

इस बार भी हाईकमान ने निराशा में डाल दिया
पांच साल पुराने विरोध को झेलकर 2014 तक लोकसभा सांसद के टिकट का इंतजार करने वाले बची सिंह रावत को इस बार हाईकमान ने निराशा में डाल दिया है।

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विरोध की आग तब ज्यादा भड़की, जब भगतदा पर भरोसा करते हुए हाईकमान ने उन्हें भावी सांसद की सीढ़ी चढ़ने के लिए चुनावी जंग में उतारा। अब बचदा अपना विरोध 27 मार्च को हाईकमान के सामने जताने दिल्ली जा रहे हैं।

पार्टी सूत्रों की मानें तो दिल्ली कूच के दौरान बचदा के साथ भाजपा की फौज का एक शीर्ष नेतृत्व भी उनके साथ रहेगा। इनमें कुछ विधायक, पूर्व सांसद, पूर्व प्रांतीय पदाधिकारी और भगतदा के पुराने विरोधी भी शामिल हैं।
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मैं अब पहले हाईकमान से बात करता हूं, फिर मीडिया के सामने आऊंगा। कुछ नहीं भूला हूं। उत्तराखंड में मेरे इतने साल के राजनीतिक कैरियर में जब-जब जो कुछ हुआ, वो याद है। हाईकमान के सामने सारी बात रखूंगा।
- बची सिंह रावत, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष भाजपा
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