बदरी-केदार की धरती और पौड़ी लोकसभा सीट के आठ से ज्यादा विधानसभा क्षेत्रों में चुनावी महासमर से इतर फिलहाल यात्रा और मौसम के ही चरचे हैं।
पढ़ें, केदारनाथ यात्राः केदारघाटी में फिर डरा रहा मौसम
इन इलाकों में आपदा के बाद सरकार के पुनर्निर्माण के दावे परखे जा रहे हैं और यात्रा मार्ग लोगों की जुबान पर है।
एक तरफ तसल्ली चारधाम यात्रा चल निकलने की है तो दूसरी तरफ इसका अहसास भी होने लगा है कि इसकी तैयारियां और बेहतर हो सकती थीं।
तस्वीरों में देखें, भक्तों के लिए खुला भगवान बदरीनाथ का द्वार
पौड़ी लोक सभासीट के तहत कोटद्वार से लेकर लैंसडौन तक ही चुनाव की हलचल देखने को मिल रही है। विधानसभा चुनाव 2012 में भाजपा ने यहां खंडूड़ी है जरूरी का नारा दिया था।
इस बार यह नारा बदलकर मोदी है जरूरी हो गया है। फिलहाल कोटद्वार, लैंसडौन, पौड़ी, रामनगर में खंडूड़ी बनाम हरक के किस्से हैं। आप और अन्य दल भी इसमें सेंध लगाने की कोशिश में हैं।
पढ़ें, एक ही मोहल्ले के 25 लोगों ने किया महिला का उत्पीड़न
इस लोकसभा सीट का बड़ा हिस्सा उन विधानसभा क्षेत्रों में हैं जिनमें बदरी और केदार धाम स्थित हैं। देवप्रयाग, श्रीनगर, रुद्रप्रयाग, कर्णप्रयाग, बदरीनाथ, केदारनाथ आदि विधानसभा क्षेत्रों में यात्रा और मौसम के ही चरचे हैं।
चुनाव यहां भूले-भटके ही लोगों के जुबान पर आ रहा है। केदारघाटी में गुप्तकाशी से लेकर केदारनाथ तक तो राजनीतिक दलों के झंडे-बैनर कहीं-कहीं दिखाई दे रहे हैं। यही हाल बदरीनाथ मार्ग पर जोशीमठ से आगे का है।
पढ़ें, फौजी पति का थप्पड़ बना महिला का काल
इन विधानसभा क्षेत्रों में लोग चारधाम यात्रा में ही जुटे हैं। हालांकि यात्रा की पहले जैसी रौनक नदारद है। सुकून है तो बस इतना कि यात्रा चल निकली है। यह भी साफ है कि यात्रा बहुत कुछ मौसम के मिजाज पर निर्भर करेगी।
यात्रा और मौसम को लेकर लोगों की अपनी राय है। आम धारणा यह है कि यात्रा के लिए सरकार और बेहतर तैयारी कर सकती थी लेकिन अगर जून 2013 की आपदा के आठ माह के दौरान भी काम हुआ होता।
सड़कों पर काम ऐन यात्रा से दो माह पहले से शुरू हुआ। इसी तरह आपदा से ध्वस्त हो गए पर्यटन को अभी पटरी पर लाया जाना बाकी है।
पढ़ें, अमीषा पटेल किस देकर कांग्रेस के लिए मांग रहीं वोट
ऐसे में यात्रा को लेकर सरकार की तैयारियों को लोगों ने परखना शुरू कर दिया है। बदरीनाथ और केदारनाथ की धरती पर अब सरकार का परफारमेंस आने वाले यात्रियों की संख्या पर भी निर्भर कर रहा है।
आने वाले यात्रियों की संख्या ठीक रही तो शायद आधी अधूरी तैयारी पर ध्यान न दिया जाए। यात्री नहीं आए तो सरकार के खिलाफ लोगों की नाराजगी का ग्राफ भी बढ़ सकता है।