निरक्षरों को साक्षर बनाने के लिए साक्षर भारत कार्यक्रम में उत्तराखंड के 6 जनपदों को शामिल किया जा रहा है।
राज्य साक्षरता मिशन से जुड़ेंगे पांच लाख
दो बरस में इन 6 जनपदों के पांच लाख को राज्य साक्षरता मिशन से जोड़ा जाएगा। साक्षर भारत कार्यक्रम में राज्य की जैंडर गैप यानि पुरुषओं के मुकाबले महिलाओं के अधिक निरक्षर होने की चुनौती से निपटा जाएगा।
अंतरराष्ट्रीय साक्षरता दिवस पर विज्ञान भवन नई दिल्ली में शिक्षा मंत्री मंत्री प्रसाद नैथानी ने राज्य में साक्षरता दर को गति देने के लिए समयबद्ध कार्यक्रम का खाका रखा।
साक्षर भारत के तहत चयनित जनपदों टिहरी, बागेश्वर, उत्तरकाशी, ऊधमसिंह नगर, हरिद्वार और चंपावत में अनुमानित पांच लाख निरक्षरों को बेसिक साक्षरता प्रदान की जाएगी। 2015 तक साक्षरता की दर 80 फीसदी से अधिक करने के लिए लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
मंत्री ने बताया कि प्रदेश में सबसे बड़ी चिंता पुरुष और महिलाओं की साक्षरता दर के अंतर की हैं। उन्होंने कहा कि इसके लिए पंचायत राज्य विभाग से लोक शिक्षा केंद्र, उद्योग एवं व्यवसायिक शिक्षा के मध्य समन्वय बनाया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि कार्यक्रम को प्रभावी बनाने के लिये लाभार्थियों की पहचान ग्राम पंचायतों का सघन सर्वे प्रशिक्षित प्रेरकों की तैनाती एवं लोक शिक्षा केंद्रों की स्थापना की जानी है।
शिक्षा मंत्री ने विभागीय अधिकारियों से इस कार्यक्रम को प्रभावी बनाने के लिए इंटर पर्सनल मीडिया कैंपन को अपनाये जाने पर जोर दिया है। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने साक्षर भारत पुरस्कार हेतु चयनित राज्यों के प्रतिनिधियों को सम्मानित किया।