03 ई अपशिष्ट प्रबंधन कार्यशाला में प्रतिभागियों को संबोधित करते डॉ. विजय घस्माना।
- फोटो : RISHIKESH
स्वामीराम हिमालयन यूनिवर्सिटी जौलीग्रांट में राष्ट्रीय हिमालय अध्ययन मिशन केंद्र सरकार और उत्तराखंड राज्य विज्ञान और प्रौद्योगिकी परिषद देहरादून के सहयोग से ई-अपशिष्ट प्रबंधन के विषय पर विचार-विमर्श किया गया।
बृहस्पतिवार को एसआरएचयू में कार्यशाला का उद्घाटन मुख्य अतिथि यूकॉस्ट महानिदेशक डॉ. राजेंद्र डोभाल ने किया। उन्होंने देहरादून के लोगों को वैज्ञानिक रूप से ई-कचरे के प्रबंधन और फैलाव के बारे में जागरूक करने पर जोर दिया गया। डॉ. डोभाल ने कहा कि ई-कचरे को कम करने, बदलने, दीर्घकालिक उपयोग, पुन: उपयोग और नवीनीकरण को तैयार करने और लागू करने और ई-वस्तुओं की सुविधाओं के दुरुपयोग की जांच करने की आवश्यकता है। उन्होंने विभिन्न प्रकार के ई- कचरे जैसे पुराने मोबाइल, बेकार लैपटॉप, कंप्यूटर और इलेक्ट्रॉनिक वस्तुओं से कीमती धातुओं को निकालने पर जोर दिया गया। कहा कि एक मोबाइल बैटरी कई लाख लीटर पानी को दूषित कर सकती है। अध्यक्षता करते हुए हिमालयन विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. विजय धस्माना ने कहा कि जैसे-जैसे इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों की मांग बढ़ रही है। साथ इलेक्ट्रॉनिक कचरा भी बढ़ता जा रहा है। पुराने और गैर कार्यशील ई-उपकरणों के प्रबंधन में विश्वविद्यालय नीति के विशिष्ट संदर्भों के साथ ई-कचरा प्रबंधन पर विचार साझा किए। इस मौके पर वैज्ञानिक सलाहकार डॉ. सीएस नौटियाल, डॉ. प्रशांत सिंह, डॉ. सुशीला शर्मा, डॉ. एनए सिद्दीकी, डॉ. एसएम तौसिफ, डॉ. आशुतोष चौधरी आदि ने व्याख्यान दिया।