मानसून की आहट कहें या फिर जून 2013 की आपदा का भय, यमुनोत्री-गंगोत्री धाम की यात्रा की रफ्तार धीमी पड़ गई है। रोजाना 1000 से 1200 तीर्थयात्री ही धामों का रुख कर रहे हैं।
बीते 21 अप्रैल को कपाट खुलने के बाद से अभी तक 90,775 तीर्थयात्रियों ने यमुनोत्री तथा 1,07,503 यात्रियों ने गंगोत्री धाम के दर्शन किए, जबकि बीते साल पूरे सीजन में महज 97, 816 तीर्थयात्री ही दोनों धामों के दर्शन किए थे।
इस बार शुरूआत के 50 दिनों में तो चार धाम यात्रा ने गति पकड़ी, लेकिन इसके बाद से यात्रा की रफ्तार धीमी हो गई है। आजकल 1000 से 1200 तीर्थयात्री ही धामों का रुख कर रहे हैं। इसमें बड़ी संख्या में स्थानीय लोग भी शामिल हैं।
यमुनोत्री मंदिर समिति के उपाध्यक्ष पवन प्रकाश उनियाल, पुरुषोत्तम उनियाल, मनमोहन तथा गंगोत्री मंदिर समिति के अध्यक्ष भागेश्वर प्रसाद सेमवाल, सचिव सुरेश सेमवाल आदि तीर्थ पुरोहितों का कहना है कि आपदा से चौपट हुई चार धाम यात्रा को पटरी पर लाने में तो सरकार ने सफलता हासिल कर ली, लेकिन अब भी धामों और यात्रा पड़ावों पर व्यवस्थाएं दुरुस्त करने की जरूरत है।
यमुनोत्री धाम में यात्री सुविधाओं का अभाव बना हुआ है। गंगोत्री में भी अभी तक विद्युत आपूर्ति सुचारु नहीं हो पाई है। धौलपुर राजस्थान से आए गोविंद ने बताया कि यमुनोत्री धाम तथा रास्ते के यात्रा पड़ावों पर सफाई के पुख्ता इंतजाम नहीं हैं। रास्ते में शौचालय नहीं होने से महिला तीर्थयात्रियों को दिक्कत हो रही है।
राजस्थान के मुकेश कुमार ने कहा कि जिस तरह यात्रा व्यवस्थाओं पर करोड़ों खर्च करने की बात कही जा रही है, उस हिसाब से धरातल पर काम नहीं दिख रहे। यमुनोत्री पैदल मार्ग जोखिम भरा है।