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यहां गला तर करने के लिए सुखाने पड़ते हैं होंठ

Mon, 17 Nov 2014 09:18 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
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तीन महीने पहले जहां पानी ने कहर बरपाया था वहां आज पीने के लिए पानी नहीं है। राजधानी देहरादून के बांदल वैली और सरखेत के वे इलाके जहां बादल फटे थे, बाढ़ आई थी, वहां दो घूंट पानी के लिए लोग पांच किमी दूर, झरनों और अध-सूखी जलधाराओं से पानी ला रहे हैं। ये आपदाग्रस्त वे क्षेत्र हैं जहां मुख्यमंत्री हरीश रावत ने प्राथमिकता के आधार पर विकास कार्य करने की घोषणा की थी।
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आपदाग्रस्त क्षेत्रों के ग्राम प्रधान सोमवार को अपनी व्यथा कथा सुनाने जिलाधिकारी कार्यालय आए थे। उनका कहना था कि ग्राम पंचायत अस्थल, खैरीमान सिंह, मालदेवता, सरखेत, शेर की बोटा, शेरा गांव, सरोना, नाली कला, चामासारी, मोटीधारा, फुलेत सीमयारी, छमरौली क्यारा कहीं भी पीने के पानी की व्यवस्था नहीं हो पाई है।

अब इन क्षेत्रों में कोई सरकारी कर्मचारी भी नहीं जाता। वे अधिकारियों से मिलते हैं तो बस एक ही बात कहकर टरका दिया जाता है कि बजट नहीं आया है। जिलाधिकारी बजट जारी कर दें तो काम हो जाए। आपदाग्रस्त क्षेत्रों के लिए मुख्यमंत्री ने जो समिति बनाई थी, वह दो-तीन बार क्षेत्र का दौरा कर चुकी है। लेकिन किसी विभाग ने यहां अपनी योजना शुरू नहीं की है।
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क्या कहते हैं अधिकारी

'रास्ता होने से गांव में बोई हुई सब्जियां खराब हो रही हैं। रास्ता न होने से किराये के वाहन वाले आने से मना कर देते हैं। प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना के अधिशासी अभियंता को बताया लेकिन कोई काम नहीं हुआ।'
-रजन जवाड़ी, अध्यक्ष प्रधान संगठन न्याय पंचायत सरोना

'पानी के प्राकृतिक संसाधान सूख गए हैं। पांच किमी दूर से पीने का पानी लाना पड़ रहा है। झरनों, जलधाराओं में गंदा पानी आ रहा है। उसी पानी को किसी तरह पीने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। अभी तक कोई विकास कार्य शुरू नहीं हुआ। सब बजट का रोना रोते हैं।'
-सुनीता बिष्ट, प्रधान अस्थल

इन विभागों को करना है काम
-सिंचाई विभाग, लघु सिंचाई, लोक निर्माण विभाग, जल निगम, जलसंस्थान, प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना

'वहां काम चल रहा है। बड़े कार्यों के लिए शासन से एक-दो दिन में पैसा रिलीज हो जाएगा।'
-उमेश शर्मा काऊ, अध्यक्ष मालदेवता-सकलाना आपदा प्रबंध समिति
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