रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) में व्याप्त भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के कई मामलों का खुलासा करने वाले पूर्व अधिकारी से परेशान होकर अब संस्थान उसकी पेंशन सुविधा रोकने के लिए चेतावनी दे डाली है।
अधिकारी न केवल अपनी वेबसाइट क्रप्शन इन डीओडीओ बल्कि सीधा प्रधानमंत्री को पत्र लिखकर संस्थान में भ्रष्टाचार के मामलों को भेज रहा है। पीएमओ से आए दिन पत्रों के संबंधित डीआरडीओ में हो वाली पूछताछ संस्थान के गले की फांस बनी है। एक दूसरे मामले में एक सेवारत वैज्ञानिक को भी पीएम और रक्षामंत्री को सीधे पत्र लिखने पर संस्थान ने नोटिस जारी किया है।
डीआरडीओ की डील प्रयोगशाला में तैनात रहे दून निवासी प्रभु डंडरियाल लंबे समय से व्हिसल ब्लोअर हैं, जो अपनी वेबसाइट के माध्यम से कई मामलों के तथ्य प्रकाशित करते रहें है। उनके किये खुलासों से कई वैज्ञानिकों की सेवाएं तक समाप्त हुई हैं।
पीएम के पब्लिक पोर्टल पर प्रभु ने कई मामलों को डाला
नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद पीएम के पब्लिक पोर्टल पर प्रभु ने कई मामलों को अपलोड करने और उनसे पत्राचार शुरू किया। इससे डीआरडीओ के स्टाफ ग्रिवियेन्स आफिसर ने प्रभु को पीएमओ पोर्टल पर गलत और भ्रामक जानकारियां पोस्ट करने का आरोपी बताते हुए चेतावनी दी है कि भविष्य के लिए चेतावनी दी है।
संगठन ने सीसीएस (पेंशन) रुल 1972 का हवाला दिया जिसका वह उल्लंघन कर रहे हैं। प्रभु डंडरियाल ने बताया कि डीआरडीओ में भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के मामलों के खिलाफ एक दशक से खुलासे कर रहे हैं।
कुछ मामलों में जनहित याचिका तक की है। अब पीएमओ में लगातार भ्रष्टाचार पर पत्राचार करने से चेतावनी जारी की है, लेकिन मेरा अभियान जारी रहेगा।
पीएम राहत कोष में पेंशन देने का भेजा पत्र
डीआरडीओ की प्रभु को मिली चेतावनी के बाद उन्होंने फिर पीएम नरेंद्र मोदी को पत्र लिख दिया है। उन्होंने पत्र में भ्रष्टाचार के खिलाफ अपनी मुहिम जारी रखते हुए अपनी पेंशन प्रधानमंत्री राहत कोष में दान देने की बात कही है। पीएमओ से इस संबंध में जरूरी कार्यवाही करने के लिए निवेदन किया है।