साल बाद भी अधूरे दून मेडिकल कॉलेज का निर्माण अभी और लंबा खिंच सकता है। चिकित्सा शिक्षा विभाग की सख्ती के बावजूद काम बेहद धीमा चल रहा है।
टल सकती है एमसीआई की मान्यता
इसके चलते मार्च में मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (एमसीआई) के निरीक्षण तक जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर यहां मौजूद हो पाना नामुमकिन है। ऐसे में कॉलेज को एमसीआई की मान्यता भी टल सकती है।
दून मेडिकल कॉलेज का निर्माण महंत इंदिरेश अस्पताल के पीछे और हरिद्वार रोड स्थित पुरानी जेल के पास किया जा रहा है। चिकित्सा शिक्षा विभाग ने मार्च में एमसीआई का इंस्पेक्शन कराने का फैसला लिया है। 2011-12 में शुरू हुए निर्माण की चाल बेहद धीमी है।
पहले दो साल तो जैसे-तैसे निर्माण एजेंसी ने पास कर लिए लेकिन अब मार्च 2015 में एमसीआई की टीम निरीक्षण को आने वाली है। इंफ्रास्ट्रक्चर न होने की सूरत में कॉलेज को मान्यता नहीं मिल पाएगी। इसका नुकसान प्रदेश के उन युवाओं को होगा जो इस बार मेडिकल प्रवेश परीक्षा पास कर कॉलेज में एमबीबीएस में दाखिले का ख्वाब संजोए हुए हैं।
बता दें कि नौ दिसंबर 2009 को राज्य सरकार के प्रपोजल पर दून पहुंची एमसीआई की टीम में सदस्य डॉ. रामप्रकाश, डॉ. शेरगिल और डॉ. विनीता जैन ने सभी सरकारी अस्पतालों का निरीक्षण करने के बाद मेडिकल कॉलेज को हरी झंडी दे दी थी।
मार्च 2011 में पुरानी जेल के पास तत्कालीन मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने मेडिकल कॉलेज का शिलान्यास किया। इस वक्त प्रदेश में दो सरकारी मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस की राज्य कोटे की 170 सीटें हैं। दून मेडिकल कॉलेज बनने के बाद सीटों की संख्या बढ़कर 255 हो जाएगी।
निर्माण कार्य तेज करने पर जोर दिया जा रहा है। उम्मीद है कि जल्द ही इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार कर लिया जाएगा। एमसीआई की टीम आने के बाद कोई कमी पाई गई तो उसे भी जल्द दूर किया जाएगा।
- डॉ. आरपी भट्ट, निदेशक, चिकित्सा शिक्षा