सूचना मिलने पर एसपी सिटी श्वेता चौबे मौके पर पहुंची। उन्होंने इलाज में देरी पर सख्त नाराजगी जताई। कुछ डॉक्टर फिर भी अपनी जिद पर अड़े रहे। इस पर उन्होंने एसएसपी से बात कराने को कहा तो डॉक्टर इलाज और मेडिकल के लिए तैयार हुए।
डॉक्टर, इलाज से नहीं कर सकता इंकार
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. एसके गुप्ता का कहना है कि कोई भी डॉक्टर ऐसे हालात में इलाज से इंकार नहीं कर सकता है। डॉक्टर किसी भी मामले में शुरुआती इलाज जारी रख सकते हैं। दुष्कर्म के मामलों में जहां तक मेडिकल की बात है तो पुलिस को सूचना दी जाती है। अक्सर पुलिस पीड़ित को लेकर पहुंचती है। लेकिन, सूचना देने के बाद भी मेडिकल किया जा सकता है।
मासूम को समय से इलाज न देना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण मामला है। कानूनी औपचारिकता से पहले इंसान की जिंदगी है। डॉक्टरों को नोटिस भेजकर जवाब मांगा जाएगा। इसके बाद आगे की कार्रवाई होगी।
- ऊषा नेगी, अध्यक्ष, राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग
बुधवार को टिहरी क्षेत्र के एक गांव में चार साल की बच्ची से दुष्कर्म का मामला सामने आया है। इस मामले में आरोपी, पीड़ित मासूम का रिश्ते में भतीजा लगता है। वह उससे 10 साल बड़ा है। अकेली बच्ची को देखकर वह घर में घुसा और बहला फुसलाकर बच्ची को जंगल ले गया। वहां उसने वारदात को अंजाम दे डाला।
जंगल से घास लेकर लौटी मां और पिता बच्ची को लेकर दून अस्पताल लेकर पहुंचे। लेकिन, हालत गंभीर होने पर डॉक्टरों ने उसे श्रीमहंत इंदिरेश अस्पताल रेफर कर दिया। शिकायत पर शहर कोतवाली देहरादून में पुलिस ने जीरो नंबर पर एफआईआर दर्ज की है।
बुधवार को कोतवाली के वरिष्ठ उपनिरीक्षक अशोक राठौर ने बताया कि पीड़ित बच्ची को लेकर उसके माता-पिता बुधवार रात करीब 12.30 बजे दून महिला अस्पताल पहुंचे थे। यहां चिकित्सकों ने बच्ची की हालत देखकर बिना मुकदमा दर्ज किए उपचार करने से साफ इनकार कर दिया।
अस्पताल प्रबंधन की सूचना पर कोतवाली पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस टीम ने पीड़ित मासूम के मां-पिता से घटना की जानकारी ली। सुबह करीब सात बजे बच्ची की मां ने कोतवाली में शिकायत दर्ज कराई। वरिष्ठ उपनिरीक्षक अशोक राठौर ने बताया कि प्राथमिक जांच पड़ताल के बाद एफआईआर को टिहरी पुलिस को ट्रांसफर किया जाएगा।