डायनेमिक एश्योर्ड कैरियर प्रोग्रेशन (डीएसीपी) के मुद्दे पर उत्तराखंड में ‘धरती के भगवान’ दो धड़ों में बंट गए हैं। सरकारी डॉक्टरों के संगठन प्रांतीय चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवा संघ में दरार आ गई है।
एक गुट ने शीर्ष नेतृत्व पर अनदेखी का आरोप लगाते हुए अलग कार्यकारिणी गठित की है। जबकि प्रदेश अध्यक्ष डॉ. बीएस जंगपांगी ने इसे असंवैधानिक करार दिया है। उन्होंने संगठन विरोधी गतिविधियों में शामिल डाक्टरों की सदस्यता भंग करने के लिए जांच बैठा दी है।
डॉक्टरों में दो फाड़ के आसार की खबर ‘अमर उजाला’ ने सोमवार के अंक में ही प्रकाशित कर दी थी। सोमवार सुबह नौ बजे दून, महिला अस्पताल, कोरोनेशन, हरिद्वार जिला अस्पताल और स्वास्थ्य महानिदेशालय के करीब 80 डॉक्टर दून अस्पताल के सभागार में एकत्र हुए। वक्ताओं ने कहा कि सरकार डीएसीपी की आड़ में विशेषज्ञ डॉक्टरों को मिलने वाली वेतन वृद्धि को समाप्त करना चाहती है।
वेतन वृद्धि वापस लेने पर इस्तीफे की चेतावनी
इतना ही नहीं वक्ताओं ने आरोप लगाया कि अध्यक्ष और महासचिव ने डॉक्टरों को अंधेरे में रखा। इन्होंने संघ को भंग करने का दावा कर डॉ. एसडी जोशी और डॉ. आरएस चौहान को क्रमश: कार्यवाहक प्रदेश अध्यक्ष और महासचिव बनाया है। शीघ्र ही आंदोलन की रणनीति तय होगी।
कुछ डॉक्टरों ने वेतन वृद्धि वापस लेने पर इस्तीफे की चेतावनी भी दी। बैठक में डॉ. आरएस असवाल, डॉ. डीपी जोशी, डॉ. बीसी रमोला, डॉ. केसी पंत, डॉ. जीएस रावत, डॉ. एनएस खत्री, डॉ. पंकज शर्मा, डॉ. मुकेश सुंदरियाल आदि शामिल थे।
‘निजी स्वार्थ के लिए डाल रहे दरार’
दिनभर चले घटनाक्रम के बाद सोमवार शाम प्रांतीय चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवा संघ के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. बीएस जंगपांगी और महासचिव डॉ. एसके गोस्वामी ने चंदरनगर में पत्रकार वार्ता की।
बताया कि डीएसीपी के लिए संगठन लंबे समय से संघर्षरत है। विशेषज्ञ डॉक्टरों की अतिरिक्त वेतन वृद्धि रोकने के भी खिलाफ है। डॉक्टरों की इस समस्या को संघ स्वास्थ्य मंत्री के समक्ष रख चुका है।
कुछ डॉक्टर निजी स्वार्थ के लिए एसोसिएशन में दरार डाल रहे हैं। ताकि दबाव की राजनीति कर सकें। इस दौरान उपाध्यक्ष डॉ. आरके सिंह, डॉ. नरेश नपलच्याल, डॉ. मेघना असवाल, डॉ. अर्चना, डॉ. आनंद शुक्ला आदि शामिल थे।