डॉक्टर को शायद इसीलिए धरती के ‘भगवान’ का दर्जा दिया गया है। कई बार डॉक्टर मरीज की मर्ज की गंभीरता और जान खतरे में देखकर खुद ही रिस्क लेने को तैयार हो जाता है।
ऐसा मामला सामने आया है उत्तराखंड के राजकीय संयुक्त चिकित्सालय कोटद्वार में। अस्पताल के वरिष्ठ सर्जन डॉक्टर अरुण कुमार पांडे ने तीमारदारों की मनाई के बाद भी एक किशोर का आपरेशन करके उसकी जान बचा ली।
16 वर्ष के श्रवण कुमार का टायफायड बिगड़ने के बाद पेट की आंत फट गई थी और जहर फैल गया था। डॉक्टर पांडे के साथ दो और डॉक्टरों ने करीब दो घंटे के जटिल आपरेशन के बाद श्रवण को नया जीवन दिया।
रिखणीखाल ब्लाक के धैड़ गांव निवासी मनोहर लाल और सतेश्वरी देवी का 16 वर्षीय बेटा श्रवण कुमार जीआईसी द्वारी में 11वीं छात्र है। वह एक माह से बुखार से पीड़ित था। उसे पेट में हल्के दर्द की शिकायत हुई। 25 अगस्त को दर्द बढ़ा तो परिजन उसे पाणीसैंण स्थित प्राइवेट डॉक्टर के पास ले गए लेकिन कोई सुधार नहीं हुआ।