स्वाइन फ्लू का इलाज करने वाले एक डॉक्टर साहब इन दिनों परेशान हैं। ऐसे वक्त में उन्हें स्वाइन फ्लू के संबंध में लोगों को जानकारी देने की जिम्मेदारी दे दी गई है जब शहर के हर घर में जुकाम-बुखार के रोगी हैं।
चूंकि स्वाइन फ्लू का हौव्वा खड़ा हो गया है सो जिस आदमी को लगातार तीन छींकें आ गईं उसके दिमाग की घंटी बजने लगती है। अमूमन बच्चों की नाक बहने की अनदेखी करने वाली माताएं इस वक्त चौकन्नी हैं। जैसे ही बच्चे की नोजी आई तुरंत डॉक्टर साहब का फोन डायल कर दिया।
डॉक्टर साहब को इतने फोन रिसीव करने की आदत तो है नहीं। कहते हैं कि मरीजों को डांटता हूं, पत्नी से लड़ता हूं। मेरा नंबर किसी ने कैसे दे दिया? मेरा पर्सनल नंबर है। उनके साथी मौज ले रहे हैं कि पहले शिकायत करता था कि मरीज नहीं आते अब मरीजों के फोन आ रहे हैं तो उलझन में है।