छह महीने पहले उत्तराखंड सरकार ने जिन तीन कर उपायुक्तों को धूमधाम से निलम्बित किया था, उन पर एक मामले में लापरवाही के अलावा ऐसा कोई गंभीर आरोप साबित नहीं हुआ।
जांच अधिकारी श्रीधर बाबू अद्दांकि दो महीने पहले ही जांच रिपोर्ट भी सौंप दी। सितम्बर माह में ही उच्च न्यायालय ने इस मामले को चार महीने में निस्तारित करने को भी कहा, लेकिन छह महीने बीते, तीनों उपायुक्तों को निलम्बित रख बगैर काम के आधी तनख्वाह दी जा रही है।
सोलह अगस्त 2014 को काम में अनियमितता बरतने के आरोप में शासन ने तीन कर उपायुक्त आईके खुल्बे, ठाकुर रणबीर सिंह व निशिकांत सिंह को सस्पेंड कर दिया था। इस मामले में सरकार ने भ्रष्टाचारियों पर चोट करना बताकर खूब वाहवाही लूटी।
तीनों निलम्बित अफसरों की रिट पर उच्च न्यायालय ने पंद्रह सितम्बर 2014 को जांच पूरी कर चार महीने में मामला निस्तारित करने को कहा। जांच अधिकारी अपर सचिव श्रीधर बाबू अद्दांकि ने जो जांच रिपोर्ट दी उनमें इन अफसरों पर तीन आरोप थे लेकिन एक में लापरवाही के अलावा कुछ खास नहीं मिला। मगर, जांच रिपोर्ट दबी पड़ी है।
शासन ने न्यायालय के आदेश के बावजूद इस जांच रिपोर्ट का निस्तारण नहीं किया। परिणामस्वरूप, तीनों निलम्बित अफसरों को बगैर काम किए ही पिछले छह महीने से आधा वेतन दिया जा रहा है, जो कि राजकोष पर एक तरह से चोट है। मगर, अभी भी जांच रिपोर्ट शासन में इधर से उधर घूम रही है।
इस मामले को मैं देखूंगा कि जांच रिपोर्ट आने के बाद भी मामले का निस्तारण क्यों नहीं हो रहा है। जांच के आधार पर प्रकरण निस्तारित होना चाहिए।
- राकेश शर्मा, अपर मुख्य सचिव