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रक्तदान कर डॉक्टर बने मरीजों के 'भगवान'

Mon, 03 Mar 2014 07:08 PM IST
अमर उजाला, कोटद्वार
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डॉक्टर किसी भी मरीज के लिए भगवान ही होता है। बावजूद इसके अस्पताल में जिंदगी और मौत से जूझ रहे मरीज को अपना खून देकर बचाने वाले डॉक्टर कम ही होते हैं। राजकीय संयुक्त अस्पताल में सीएमएस डा. आईएस सामंत इन्हीं में एक हैं।
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डा. सामंत अब तक सात बार रक्तदान कर चुके हैं। जब भी कोई इमरजेंसी मरीज होता है, और ब्लड बैंक में रक्त नहीं होने पर डोनर भी नहीं मिलता है, तब डा. सामंत रक्तदान के लिए खुद आगे आते हैं।

यही नहीं जुलाई में एक महिला के लिए जब ब्लड की कहीं व्यवस्था नहीं हो पाई तो डा. सामंत की पत्नी ने रक्तदान कर उसकी जाच बचाई। डा. सामंत का कहना है कि खून देकर किसी की जान बचाने से बेहतर कोई अहसास नहीं हो सकता है।
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अमर उजाला की मुहिम को सहयोग देगी सभा

युवा वैश्य अग्रवाल सभा की बैठक में अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से  रक्तदान की मुहिम की प्रशंसा की गई। कहा गया कि उनके सदस्यों ने भी कई बार रक्तदान किया है। अवधेश अग्रवाल तो अब तक 27 बार रक्तदान कर चुके हैं।

अमित जैन, अमिताभ अग्रवाल और हिमांशु अग्रवाल चार बार, अरविंद बंसल तीन बार, मनोज गुप्ता दो जबकि आशीष रंजन, सचिन गोयल, नवीन गुप्ता और नीरज अग्रवाल एक बार रक्तदान कर चुके हैं।

बैठक में अमर उजाला की रक्तदान मुहिम से जुड़कर हर संभव सहयोग करने और किसी भी वक्त रक्तदान करने के लिए तत्पर रहने का संकल्प लिया गया।
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खून देकर नवजात को दिया नया जीवन

अमर उजाला फाउंडेशन के डोनर क्लब के सदस्य मनीष कोठियाल ने बेस अस्पताल में पैदा हुए नवजात को खून देकर नया जीवनदान दिया है। अब नवजात बिल्कुल स्वस्थ है। पेशे से शिक्षक, नगर क्षेत्र के नामी खिलाड़ियों में शामिल मनीष ने तीन दिन पूर्व ही डोनर क्लब की सदस्यता ली थी।

शनिवार को जन्म देने के साथ ही पीलिया की चपेट में आई रुद्रपयाग निवासी शैली के नवजात शिशु के इलाज के लिए डॉक्टरों ने खून की जरूरत बताई। बच्चे को ओ नेगेटिव खून की आवश्यकता होने की जानकारी मिलने पर मनीष अस्पताल पहुंचे गए।

परेशान माता-पिता तथा परिजनों को तब राहत मिली जब उनके बच्चे को रक्त चढ़ाया गया। बाल रोग विभाग की विभागाध्यक्ष प्रो. स्नेहलता सूद ने बताया कि बच्चा पूरी तरह स्वस्थ है। उन्होंने कहा कि पीलिया हो जाने पर बच्चे को नया खून चढ़ाना होता है।

समय पर खून मिलने पर पीलिया कम हो रहा है। अमर उजाला डोनर क्लब के सदस्य बन चुके मनीष कोठियाल ने कहा कि उनका एक यूनिट खून किसी की जान बचा सकता है तो वह उसके लिए तैयार हैं।
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