विधायकों के निशाने पर अब अधिकारी हैं। पिछले दिनों कैबिनेट की बैठक में कुछ मंत्रियों ने यह मामला उठाया था, अब राज्य विधानसभा में विधायक यही बात कह रहे हैं।
विपक्ष हो या फिर सत्ताधारी, सभी दलों के विधायकों की अफसरों से नाराजगी दिख रही है। बुधवार को भी आपदा पर चर्चा करते हुए कई विधायकों ने अफसरों के प्रति अपनी नाराजगी जाहिर की थी।
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गुरुवार को भी यही स्थिति रही। उन्होंने कहा कि डीएम से लेकर एसडीएम तक सभी साहब हैं। विधायकों की कोई सुनने को तैयार नहीं।
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विधायक खफा भी नजर आए
हालांकि कई विधायकों ने अफसरों की तारीफ भी की, लेकिन सत्ताधारी दल के ही कई विधायक खफा भी नजर आए।
विकासनगर के विधायक नवप्रभात ने बताया कि आपदा को बीते हुए तीन महीने हो चुके हैं, लेकिन दिल्ली-यमुनोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग अब तक नहीं खुल पाया है।
वे इस बारे में कई बार अधिकारियों को बता चुके हैं। इस बारे में अफसर शासन और सरकार को गलत जानकारी दे रहे हैं कि यह रास्ता खुल गया है।
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रेस्क्यू रिस्पांस में भी प्रशासनिक चूक
नवप्रभात ने रेस्क्यू रिस्पांस में भी प्रशासनिक चूक बताते हुए कहा कि अगर समय से रिस्पांस हुआ होता तो हालात इतने खराब नहीं हुए होते। नदियों के मलबे की सफाई में लेटलतीफी का भी ठीकरा उन्होंने अफसरों के सिर फोड़ा।
वहीं श्रीनगर विधायक गणेश गोदियाल ने बताया कि उनकी विधानसभा क्षेत्र का मैंठाड़ा और उसके आसपास के करीब बीस गांवों को जोड़ने वाली सड़क अब तक नहीं खोली गई, जबकि जिला अधिकारी को इस बारे में कई बार वे बोल चुके हैं।
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अफसरशाही हावी
पूर्व मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल निशंक ने कहा कि राहत कार्यों पर अफसरशाही हावी रही। नए आईएएस को राहत आयुक्त बना दिया गया।
सीनियर और अनुभवी अधिकारी अपनी जगह छोड़ने को तैयार नहीं। जबकि इन कार्यों में जिम्मेदार अफसरों को लगाया जाना चाहिए। उन्होंने राहत किट घोटाले के लिए भी अफसरों की जिम्मेदारी तय करने की बात कही।