तानसेन जब दीपक राग गाते थे, तो चिराग खुद-ब-खुद जल उठते थे... पूरा माहौल रौशन हो जाता था। ऐसा ही करिश्मा 26 साल के विपुल ने किया जब उन्होंने बाजार में मिट्टी के दीये बेच रहे लोगों के पास खड़े होकर गिटार पर धुन छेड़ी और गीत गाने लगे। मधुर संगीत और दिलो-दिमाग को मोहित करने वाले गाने सुनकर लोग जुटे और उनकी एक अपील पर मिट्टी के दीये खरीदने लगे। कुछ ही देर पर मिट्टी के दीये बेच रहे लोगों की जेब गरम हो गई और उनके चेहरों पर दीपावली की रात दिखने वाली रोशनी चमकने लगी। विपुल ने उनकी दीपावली धन की रोशनी से भर दी।
दिल्ली से पोस्टग्रेजुएट हैं विपुल कुमार
वाकया चकराता रोड का है जहां सुबह से ही मिट्टी के दीये बेचने वाले ढेरी लगाए बैठे थे। शाम होने को आई लेकिन बिक्री कुछ खास नहीं हो पाई। तभी दिल्ली से पोस्टग्रेजुएट विपुल कुमार पहुंचे। दून से इन दिनों संगीत की शिक्षा ले रहे विपुल ने बैग से गिटार निकाला और उसके तारों को झंकार दी। लोगों का ध्यान बरबस बाजार में गिटार की झंकार पर गया।
कुछ ही पलों में मधुर संगीत उनके कानों में पड़ा और फिर विपुल के गीतों ने उनके कदमों को दिशा दे दी। दुकानों से खरीदारी छोड़ लोग उनके पास जुटने लगे। गाने के अंतरों के बीच कुछ पलों में उन्होंने मिट्टी से जुड़ने के साथ कुम्हारों के लिए लक्ष्मी का अवतार लेने की अपील की तो लोग भावुक होकर मिट्टी के दीये खरीदने लगे।
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लोगों की भीड़ देख दीये बेचने वालों के चेहरे पर मुस्कुराहट खिलने लगी। बकौल विपुल वह कुछ समय से दिल्ली में ही रह रहे थे। दस दिन पहले ही वह दून आए थे। यहां वह करनपुर में रह रहे हैं और संगीत की शिक्षा ले रहे हैं। उन्होंने बताया कि अपने गुरु के पास आए हैं। बतौर विपुल हर युवा के पास कुछ न कुछ ऐसा हुनर जरूर होता है जो किसी की मदद कर सकता है और औरों के जीवन में खुशियां, रंग और रोशनी बिखेर सकता है।
मेरी किसी मदद करने से जो सुकून महसूस होता है। उसका अहसास बहुत अलग है। मेरे लिए मेरी यह दीपावली बेहद खास और सबसे अच्छी बन गई है।
-विपुल कुमार