अगर आप दीपावली पर खूब पटाखे फोड़ने की योजना बना रहे हैं तो जरा संभल अतिशबाजी करिएगा। दरअसल, राजधानी देहरादून तक में सरकारी अस्पतालों में बर्न यूनिट की समुचित सुविधा नहीं है। इसलिए पटाखे चलाते समय सावधानी और सतर्कता रखनी जरूरी है। वरना जरा सी लापरवाही उपचार न मिलने पर जान पर भारी पड़ सकती है।
देहरादून : सबका सहारा कोरनेशन अस्पताल
देहरादून के सरकारी अस्पतालों में बर्न यूनिट की समुचित सुविधा नहीं है। राजकीय जिला कोरोनेशन अस्पताल ही एकमात्र सरकारी अस्पताल है जिसमें बर्न यूनिट है। तमाम निजी अस्पतालों में स्तरीय बर्न यूनिट नहीं हैं। जिसके चलते मरीजों को मेरठ और दिल्ली जैसे शहरों के लिए रेफर करना पड़ता है। यहां तक कि कई बार अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) ऋषिकेश और राजकीय दून मेडिकल कॉलेज अस्पताल से भी मरीज कोरोनेशन अस्पताल रेफर करने पड़ते हैं। कोरोनेशन अस्पताल में भी बर्न यूनिट मानकों पर खरी नहीं उतरती। सामान्य दिनों में अस्पताल के बर्न वार्ड में 12 बेड रहते हैं जो दीपावली के दौरान 18 कर दिए जाते हैं। अस्पताल में जो बर्न यूनिट है उसमें आईसीयू की सुविधा भी उपलब्ध नहीं है। अस्पताल की प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक डॉ. शिखा जंगपांगी ने बताया कि अस्पताल के नए भवन में आईसीयूयुक्त आधुनिक बर्न यूनिट तैयार है।
हरिद्वार : यहां आए तो रेफर किए जाएंगे दून
हरिद्वार के बड़े दोनों अस्पताल जिला चिकित्सालय और मेला अस्पताल में पटाखों से झुलसे लोगों के उपचार के लिए बर्न यूनिट नहीं है। पहले सालों में मेला अस्पताल में दीपावली के मद्देनजर अस्थाई तौर पर बर्न यूनिट बना दी जाती थी मगर मेला अस्पताल में कोविड अस्पताल में चलने के कारण इस बार वह भी नहीं बनाई गई है। ऐसे में अगर दीपावली या अन्य किसी वजह से लोग झुलस जाएं तो उन्हें सरकारी उपचार नहीं मिलेगा।
रुद्रप्रयाग : मुकम्मल नहीं इंतजाम
जिला निर्माण के 25 वर्ष बाद भी रुद्रप्रयाग के सरकारी अस्पतालों में बर्न वार्ड की व्यवस्था नहीं हो पाई है। पीड़ितों को सीधे हायर सेंटर रेफर किया जाता है। पांच वर्ष पूर्व वनाग्नि की चपेट में आने से जिले में तीन युवतियां बुरी तरह से झुलस गई थीं। उन्हें देहरादून रेफर किया गया था। उपचार के दौरान दो की मौत हो गई थी। एक युवती लंबे समय बाद ठीक हो पाई।
चमोली : आठ बर्न वार्ड, स्पेशलिस्ट का टोटा
जिला अस्पताल सहित उपजिला अस्पताल व सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में बर्न वार्ड बनाया गया है। इलाज के लिए सिल्वर सल्फर डाइजीन भी उपलब्ध है। जिले के किसी भी अस्पताल में स्किन स्पेशलिस्ट की तैनाती नहीं है। सीएमओ डा. एसपी कुड़ियाल ने बताया कि जिले के अस्पतालों में आठ बर्न वार्ड बनाए गए हैं।
टिहरी : दून या हरिद्वार पड़ेगा जाना
जिला अस्पताल में बर्न यूनिट नहीं है। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में कोई इंतजाम नहीं। अस्पताल में स्किन स्पेशलिस्ट भी नहीं है, जिससे मरीज को रेफर करना पड़ता है। जिला अस्पताल बौराड़ी के सीएमएस डा. अमित राय ने बताया कि हल्का झुलसने पर मरीज को देहरादून और दिल्ली रेफर करना पड़ता है।
उत्तरकाशी : न बर्न यूनिट और न त्वचा रोग विशेषज्ञ
सीमांत जनपद की साढे़ तीन लाख की आबादी के लिए एक बर्न वार्ड तक उपलब्ध नहीं हैं। आगजनी की घटनाओं में गंभीर रूप से झुलसने पर देहरादून रेफर करना पड़ता है। जनपद में जिला अस्पताल में की स्थिति यह है कि बर्न वार्ड के नाम पर एक या दो बेड किसी वार्ड में लगा दिए जाते हैं। पूरे जनपद में त्वचा रोग विशेषज्ञ भी नहीं है।
पौड़ी : बेस अस्पताल का ही सहारा
इस दीपावली पर हर बार की तरह कोटद्वार के बेस अस्पताल में विशेष बर्न वार्ड तैयार किया जाएगा। अस्पताल के सर्जन को बर्न वार्ड का इंचार्ज बनाया जाएगा। ट्रामा सेंटर बिल्डिंग में वार्ड तैयार किया जाएगा। वहीं श्रीनगर में राजकीय मेडिकल कॉलेज में बर्न यूनिट नहीं है लेकिन यहां सामान्य रुप से झुलसे मरीजों का इलाज हो जाता है।