ज्योतिषाचार्य राजीव भट्ट ने बताया कि अगले दिन दिवाली पर शाम को पूजन में रोली, कुमकुम, चावल, पान, सुपारी, लौंग, इलायची, धूप, कपूर, 11 दीपक, चांदी का सिक्का, थाली पूजन सामग्री रखनी चाहिए। इसके बाद जलपात्र से थोड़ा जल लेकर और मंत्र का जाप कर मूर्तियों पर जल छिड़कना चाहिए।
पहले गणेश और गौरी का पूजन करना चाहिए
सबसे पहले गणेश और गौरी का पूजन करना चाहिए। इसके बाद कलश पूजन किया जाता है। पूजन के बाद घर की महिलाएं अपने हाथ से सोने चांदी के आभूषण आदि सुहाग की सामग्रियां लेकर मां लक्ष्मी को अर्पित करती हैं।
दिवाली की रात भी लक्ष्मी के सामने साबुत धानिया रखकर पूजा की जाती है। अगले दिन उस धनिया को गमले में या बाग में बिखेर दें। मान्यता है कि साबुत धनिया से पौधा निकल आता है और इससे अर्थिक स्थिति ठीक होती है।