उत्तराखंड क्रांति दल के फील्डमार्शल कहे जाने वाले दिवाकर भट्ट मानते हैं कि दल ने जनता में जो विश्वास खोया है उसको वापस हासिल करना आसान नहीं है।
रहना होगा संघर्ष और त्याग के लिए तैयार
दल के वरिष्ठ नेताओं को संघर्ष और त्याग के लिए तैयार रहना होगा। दिवाकर मानते हैं कि निजी स्वार्थ को किनारे कर अगर एक मंच पर नहीं आए तो आने वाले दिनों में दल बची हुई साख भी खो देगा।
दिवाकर ने माना कि दल के इस हाल के सभी वरिष्ठ नेता जिम्मेदार और जवाबदेह हैं। जुलाई 1979 में जब उक्रांद का गठित हुआ तब दिवाकर उपाध्यक्ष थे। संस्थापक सदस्य रहे दिवाकर भट्ट आज पूरी तरह से उक्रांद से अलग हैं।
दिवाकर का कहना है कि कई आंदोलनों और तपस्या से उक्रांद को खड़ा किया गया, लेकिन आज वह हाशिये पर पहुंच गया। छोटे छोटे स्वार्थों के चलते नेताओं ने दल को बांट कर उसके टुकड़े कर दिये।
2011 में हुए अपने निष्कासन को भट्ट सही नहीं मानते। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार से पार्टी का सशर्त गठबंधन था ऐसे में सात दिन के भीतर समर्थन वापसी से लेकर उनका आजीवन निष्कासन करना एक गलत कदम था।
वरिष्ठ नेताओं ने चुप्पी साधे रखी
दिवाकर मानते हैं कि दल टूटने की वह एक शुरूआत थी, जिसपर कई वरिष्ठ नेताओं ने चुप्पी साधे रखी। नतीजा यह हुआ कि इसके बाद दल के इन्हीं नेताओं का निलंबन और निष्कासन हुआ।
पिछले कुछ बरसों में जो घटा है उससे हमें सबक लेना चाहिए। दिवाकर ने कहा कि दल को संगठित होने की जरूरत है, लेकिन उसके लिए त्याग और बलिदान की जरूरत है।
काशी सिंह ऐरी, त्रिवेंद्र पंवार या किसी अन्य के अधीन चल रहे अलग अलग धड़ों को एक मंच पर आना होगा। पार्टी एक अधिवेशन बुलाकर सभी को आमंत्रित कर उसमें आम राय बनाए।
यह कार्यकर्ता तय करें कि आखिर दल को दिशा कैसे दी जाए। दिवाकर ने कहा कि मैं पहले भी स्पष्ट कर चुका हूं कि मुझे संगठन में किसी पद की इच्छा नहीं है। बतौर एक साधारण कार्यकर्ता में अपने चार दशक के अनुभव को उक्रांद को दोबारा खड़ा करने के लिए देना चाहता हूं।
नहीं थम रहे एकता पर अलग-अलग सुर
उत्तराखंड क्रांति दल में एकता के प्रयास पर अलग अलग सुर थमते नहीं दिख रहे हैं। क्रांति दल (पंवार धड़े ) के केंद्रीय अध्यक्ष त्रिवेंद्र सिंह पंवार ने दावा जताया है कि सर्वोच्च अधिकार समिति उनके साथ है।
उन्होंने कहा कि कोटद्वार की बैठक अवैधानिक है। उधर, कार्यकारी अध्यक्ष एपी जुयाल का दावा है कि सर्वोच्च अधिकार समिति का ही फैसला है जिसे केंद्रीय अध्यक्ष नकार नहीं सकते हैं।
पंवार ने कहा कि उक्रांद की पूरी कार्यकारिणी मेरे साथ है और शीघ्र ही कार्य समिति की बैठक बुलाकर वैधता और बहुमत साबित किया जायेगा।
उन्होंने कहा कि कार्य समिति के पदाधिकारियों ने दल से छिटके हुये लोगों को वापस जोड़ने के लिए एकता समिति का गठन किया है।
पंवार का दावा है कि कोटद्वार में दल की कोई बैठक बुलायी ही नहीं गयी तो वहां नयी सर्वोच्च अधिकार समिति, कार्यवाहक अध्यक्ष जैसे निर्णय लागू किये जाने का कोई प्रश्न ही नहीं बनता है।
दूसरों के इशारें पर काम करने वालों के लिए जगह नहीं
उन्होंने खुद पर गबन के आरोपों को निराधार बताया है। पंवार ने साफ किया है कि भाजपा, कांग्रेस के इशारों पर काम करने वाले लोगों को दल में किसी प्रकार के जगह नहीं दी जायेगी।
दूसरी तरफ काशी सिंह ऐरी के नेतृत्व वाले धड़े ने जुयाल के एकता प्रयासों को समर्थन दिया है। धड़ा एकता को लेकर आम राय बनने के बाद अपने लोकसभा प्रत्याशियों की सूची जारी करेगा।
काशी सिंह ऐरी ने कहा कि हम उक्रांद के धड़ों को एक करने के साथ अन्य क्षेत्रीय दलों से एक फ्रंट बनाने के लिए वार्ता कर रहे हैं, जिसके बाद चुनाव में प्रत्याशियों की सूची जारी होगी।