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THDC में हिस्सेदारी को लेकर कानूनी लड़ाई तेज

Mon, 15 Sep 2014 03:23 PM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
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केंद्र सरकार से दो बड़े पॉवर प्रोजेक्ट पर हरी झंडी मिलने के बाद उत्तराखंड सरकार अब टिहरी हाइड्रो डेवलेपमेंट कार्पोरेशन (टीएचडीसी) को लेकर चल रही कानूनी लड़ाई मजबूती से लड़ने को तैयार है।
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सुप्रीम कोर्ट में नहीं रखा पक्ष
जल विद्युत निगम को भरोसा है कि सुप्रीम कोर्ट उत्तराखंड के जमीनी दावे को ध्यान में रखकर उनके पक्ष में फैसला सुनाएगी। इस मामले में अभी तक उत्तर प्रदेश ने सुप्रीम कोर्ट में अपना पक्ष नहीं रखा है।

उत्तरकाशी के चार साल से बंद पड़े लोहारी नागपाला पॉवर प्रोजेक्ट को केंद्र(एनटीपीसी) की साझेदारी के साथ शुरू कराने और किसाऊ बहुउद्देश्यीय परियोजना में केंद्र से 90 फीसदी की साझेदारी तय होने के बाद जल विद्युत निगम ने टीएचडीसी से कानूनी लड़ाई के लिए विशेषज्ञों से रायशुमारी शुरू कर दी है।
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बतौर निगम के अध्यक्ष मुख्य सचिव सुभाष कुमार और निगम के प्रबंध निदेशक जीपी. पटेल दिल्ली में विशेषज्ञों व वकीलों के पैनल से कानूनी पहलूओं पर राय ले रहे हैं। निगम के प्रबंध निदेशक ने बताया कि टीएचडीसी के संयुक्त उपक्रम में 75 फीसदी की हिस्सेदारी केंद्र और 25 फीसदी यूपी सरकर की है।

उत्तराखंड सरकार ने यूपी की 25 फीसदी हिस्सेदारी को अपने पक्ष में करने का आवेदन सुप्रीम कोर्ट में किया है। इसमें यूपी को भी पार्टी बनाया गया है लेकिन उसकी ओर से कोई आवेदन कोर्ट में पेश नहीं हुआ है।

निगम ने कोर्ट में तर्क दिया है टीएचडीसी की परियोजनाएं उत्तराखंड की जमीन पर चल रही है जबकि उसे सिर्फ रायल्टी मिल रही है। जबकि अब टीएचडीसी में उत्तराखंड की हिस्सेदारी बनती है।

उल्लेखनीय है कि विभिन्न परियोजना के तहत टीएचडीसी 8800 मेगावाट बिजली उत्पादन करती है। उत्तराखंड को यूपी की जगह हिस्सेदारी मिलने पर 2200 मेगावाट बिजली पर राज्य सरकार का हक होगा।

हिमाचल का हिस्सा देते रहेंगे
उत्तराखंड जल विद्युत निगम के प्रबंध निदेशक का कहना है कि हिमाचल के साथ हुए करार के मुताबिक उसे पांच बिजली परियोजनाओं छिबरो, खोदरी, ढकारानी, ढालीपुर और कुल्हाल से मिलनी वाली बिजली मिलती रहेगी।

उनका कहना है कि कुल्हाल परियोजना को लेकर 1983 में समझौता हुआ था जिसके तहत 20 फीसदी बिजली हिमाचल को दी जाती है। जबकि चार अन्य परियोजनाओं को लेकर 1972 में हुए समझौते के तहत 25 फीसदी बिजली जनरेटिंग कॉस्ट पर दी जाती है।

उल्लेखनीय है कि समझौते में इस बात का भी उल्लेख है कि जब हिमाचल बिजली में सरप्लस स्टेट हो जाएगा तो यह व्यवस्था बंद हो जाएगी। जिस पर प्रबंध निदेशक का कहना है कि पुरानी शर्तों के मुताबिक हिमाचल को बिजली देते रहेंगे।
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