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कांग्रेस में फिर मुखर हुए कलह के स्वर

Wed, 20 Aug 2014 09:08 AM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
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उत्तराखंड कांग्रेस में अर्से के बाद फिर सरकार और संगठन के खिलाफ मुखर स्वर सुनाई दे रहे हैं।
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एक ओर सीएम हरीश रावत के विदेश दौरों पर रोक लगाने के फैसले को मंत्री हरक सिंह ने नाकाफी ठहरा कमीशनखोरी और अन्य खर्चों में भी कमी लाने की बात कही है।

दरअसल सोमवार को सीएम ने प्रदेश मंत्रियों व अधिकारियों की विदेश यात्राओं पर रोक लगाने का फैसला लिया था। सीएम का तर्क था इससे फिजूलखर्ची में कमी आएगी।

हरक सिंह रावत के बयान से आया उबाल

सीएम के बयान पर कृषि मंत्री हरक सिंह रावत ने मंगलवार को मीडिया में जो बयान दिया उसके राजनीतिक मायने निकाले जा रहे हैं।

हरक सिंह रावत का कहना है कि अकेले विदेशी दौरों पर रोक लगाने से कोई विशेष लाभ नहीं होगा।

विदेश यात्रा पर तो पांच से दस करोड़ ही खर्च होते होंगे, लेकिन राजीव गांधी ने जिस भ्रष्टाचार की बात कही थी, उस पर अंकुश लगाना जरूरी है।

हमें विकास के नाम पर खर्च हो रहे करोड़ों रुपए के कमीशन के तौर पर हो रही लीकेज को रोकना चाहिए। हमें अपने निजी स्टॉफ और अन्य खर्चों पर भी कटौती करनी होगी।

बैठक में न बुलाए जाने से गुस्साए

प्रदेश कांग्रेस सदस्यता अभियान समिति की बैठक में न बुलाए जाने पर प्रवक्ता और प्रदेश सदस्यता अभियान के संयोजक धीरेन्द्र प्रताप ने संयोजक पद से इस्तीफा दे दिया है।

धीरेन्द्र ने अपना इस्तीफा प्रभारी अंबिका सोनी को भी भेजा है। धीरेंद्र के इस्तीफ को प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष किशोर उपाध्याय की कार्यप्रणाली पर उठे सवाल के रूप में भी देखा जा रहा है।

हालांकि पिछले दिनों राज्यपाल डॉ. अजीज कुरैशी को पद छोड़ देने को लेकर आए धीरेंद्र प्रताप के बयान को प्रदेश अध्यक्ष ने निजी बताया था।
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किशोर उपाध्याय कर रहे उपेक्षा

इतना ही नहीं यशपाल आर्य के कार्यकाल में एआईसीसी से अनुमोदित प्रदेश कार्यकारिणी की अभी तक कोई बैठक नहीं हुई है।

प्रदेश के वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि प्रदेश अध्यक्ष उनकी उपेक्षा कर रहे हैं। धीरेंद्र प्रताप का कहना है कि अध्यक्ष किशोर उपाध्याय ने बुधवार को देहरादून में सदस्यता अभियान को लेकर बैठक बुलाई है।

जिसके लिए उन्हें सूचित नहीं किया गया है जबकि पार्टी ने उन्हें समिति का संयोजक बनाया था। इसलिए उन्होंने स्वयं इस पद पर बने रहना मुनासिब नहीं समझ इस्तीफा दिया है।
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