उत्तराखंड में पिछले दिनों हुए कांग्रेस विचार मंथन में निकला विष अब अपना असर दिखाने लगा है। पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा के खुले पत्र से फिर उत्तराखंड कांग्रेस का घमासान खुलकर सामने आया है।
बहुगुणा के तरकश में सवालों के और तीर हैं जो भविष्य में मुख्यमंत्री हरीश रावत की मुश्किलें बढ़ाएंगे। मुख्यमंत्री हरीश रावत वैसे तो शनिवार को दिल्ली विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के लिए प्रचार करने जा रहे हैं लेकिन केंद्रीय नेतृत्व के सामने ये मुद्दा भी उठना तय है। अपनी उलझनों में फंसे कांग्रेस केंद्रीय नेतृत्व के सामने उत्तराखंड का विवाद और परेशानी बढ़ाने वाला है।
विजय बहुगुणा खुलकर राज्य सरकार से उन फैसलों की पूछताछ कर रहे हैं जो उन्होंने दो साल केकार्यकाल के दौरान लिए थे। विजय बहुगुणा ने अमर उजाला से बातचीत में कहा कि तब भी कांग्रेस की सरकार थी और अब भी। सिर्फ नेतृत्व बदला है। मेरी कैबिनेट के फैसले भी लागू नहीं हो रहे हैं।
उनका कहना है कि कांग्रेस के घोषणापत्र में मलिन बस्तियों के नियमितिकरण की बात कही गई थी। मेरी कैबिनेट ने उस पर फैसला लिया लेकिन आज तक लागू नहीं हुआ।
कैबिनेट ने पांच साल से एक ही जगह काम कर रहे आउट सोर्सिंग कर्मचारियों को स्थाई करने का फैसला लिया था लेकिन अभी तक पूरा नहीं हुआ। उनका कहना है कि मेरी ओर से की गई घोषणाएं ठंडे बस्ते में डाल दी गई है। उनका कहना है कि मुख्यमंत्री सक्षम हैं उन्हें शासन में बैठे अधिकारी घुमा नहीं सकते हैं लेकिन उन्हें अपनी प्राथमिकता और समय सीमा तय करनी होगी।
पत्र लिखने का जनक मैं ही हूं
हरीश रावत ने कहा कि पत्र लिखने का जनक मैं ही हूं। न वे लक्ष्मण रेखा लांघ रहे हैं न हम, कोई चुनौती नहीं है एक विधायक को अपनी मांग के लिए अंगद के पांव की तरह दबाव बनाना चाहिए। मैं उनकी तारीफ करुंगा। वे पूर्व मुख्यमंत्री रहे हैं उन्हें पता है किसी प्रक्रिया में समय लगता है। सब कमेटी की रिपोर्ट मंत्रिमंडल की बैठक में रखेंगे। वे इतना श्रेय तो मुझे जरूर दें।
पार्टी से बड़ा कोई नेता नहीं है। अगर किसी को कोई परेशानी है तो पार्टी प्लेटफार्म पर बात रखे। ये बड़ा सवाल है कि पत्र मीडिया में कैसा पहुंचा, उन्हें अपनी बात मीडिया में नहीं पार्टी में रखनी चाहिए थी
-किशोर उपाध्याय, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष
मैंने उन्हीं से सीखा है पत्र लिखना। जब मैं मुख्यमंत्री था तो हरिद्वार में नल में पानी न आने पर भी वे मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर सूचित करते थे। अगर वे कांग्रेस की सरकार के दौरान लिए गए फैसलों का पूरा करते हैं तो मैं उन्हें धन्यवाद दूंगा।
-विजय बहुगुणा, पूर्व मुख्यमंत्री
अब आठ फरवरी को कैबिनेट
मुख्यमंत्री हरीश रावत के दिल्ली होने के कारण 31 जनवरी को प्रस्तावित कैबिनेट की बैठक टल गई है। बताया जा रहा है कि अब कैबिनेट की बैठक आठ फरवरी को होगी। इस बैठक में विजय बहुगुणा की ओर से उठाया गया सितारगंज का मामला भी एजेंडे में शामिल किया जाना है। उल्लेखनीय है कि विजय बहुगुणा ने पत्र लिखकर वर्ग चार और वर्ग 1-ख की भूमि के नियमितिकरण का लंबित मामले को कैबिनेट में लाने को कहा है। इस मुद्दे पर सीएम का कहना है कि सब कमेटी की रिपोर्ट आ चुकी है जिसे कैबिनेट में लेकर जाएंगे।