भाजपा नेता सतपाल महाराज ने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री हरीश रावत के 'प्यार' सवाल खड़े किए हैं।
सतपाल महाराज ने सिर्फ धारचूला के परंपरागत मार्ग से ही कैलास मानसरोवर यात्रा जारी रखने पर मुख्यमंत्री पर निशाना साधा है।
महाराज का कहना है कि प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में मुख्यमंत्री को यह मांग क्यों नहीं उठाई कि उत्तराखंड में ही गढ़वाल (बदरीनाथ-माणा) के रास्ते भी यात्रा शुरू की जा सकती है।
हरीश रावत का कुमाऊं प्रेम जगजाहिर
मुख्यमंत्री का कुमाऊं प्रेम जगजाहिर है लेकिन परंपरागत पौराणिक मार्ग केसाथ-साथ गढ़वाल से भी पुराने मार्ग को खोलने की मांग करते तो प्रदेश के इस हिस्से का भी स्वाभिमान बढ़ता।
यह बात महाराज ने शनिवार को अमर उजाला से बातचीत में कही। महाराज ने ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की सफलता के लिए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को बधाई दी है।
उनका कहना है कि चीन से कैलास मानसरोवर यात्रा के लिए एक अन्य मार्ग खोलने की मांग स्वागत योग्य है।
गरतोक मंडी होते हुए भी जा सकते हैं मानसरोवर
मुख्यमंत्री अगर अपने पत्र में इस बात का उल्लेख करते कि गरतोक मंडी होते हुए भी एक मार्ग मानसरोवर जाता है।
इसी मार्ग से बाला सिंह राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की अस्थि लेकर हिमालय गए थे। कभी लामाओं की भी इसी मार्ग से आवाजाही रही है।
इस मार्ग के खुलने से धारचूला के लंबे और कठिन मार्ग के साथ एक अन्य मार्ग भी खुल जाता। दोनों ओर से यात्राएं चलने से फायदा पूरे प्रदेश को और यात्रियों को मिलेगा।
महाराज ने मुख्यमंत्री को इस बात केलिए भी पत्र लिखने को कहा है भूटिया समाज की तमाम प्रॉपर्टी और पड़ाव आदि तिब्बत-चीन के इलाके में हैं जिसके कागजात भी उनके पास हैं।
ऐसे में उसका क्लेम भूटिया समुदाय को मिले इसका प्रयास करना चाहिए।
बीमार प्रदेश को चाहिए स्वस्थ सीएम
भाजपा में अपने लिए अहम भूमिका तलाश रहे सतपाल महाराज लंबे समय बाद विदेशी यात्रा से लौटे तो उनके निशाने पर मुख्यमंत्री हरीश रावत ही थे।
महाराज का कहना है कि जिस तरह ग्लेश्यिर पिघटने से नदियां उफना रहीं हैं और पहाड़ दरक रहे हैं, गांवों पर संकट बरकरार है उससे बीमार प्रदेश का ठीक से इलाज नहीं हो रहा है।
बीमार प्रदेश का तभी सही इलाज हो सकता है जब यहां स्वस्थ मुख्यमंत्री हो। महाराज का कहना है कि हरीश रावत लंबे समय से नदियों से जुड़ा मंत्रालय देख रहे थे।
लोगों को बसाने की दिशा में कुछ नहीं हुआ
जब पता है कि ग्लोबल वार्मिंग के चलते नदियों में हर साल यही हाल होना है तो उसके लिए क्यों नहीं कोई योजना तैयार की थी।
आपदा के बाद सरकार ने लोगों को मुआवजा तो दे दिया लेकिन लोगों को बसाने की दिशा में कुछ नहीं हुआ।
सरकार को उन्हें सुरक्षित जगह पर बसाना चाहिए था। प्रदेश के तीन सौ गांवों को हर साल खतरा रहता है लेकिन राज्य सरकार ने दो सौ गांवों की बात ही केंद्र सरकार से कही है। ऐसे में सौ गांवों को बसाने की योजना का पता नहीं है।
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