हरीश रावत ने मशक्कत के बाद मंत्रियों को जो विभाग बांटे हैं उससे एक बार फिर रिश्तों में 36 का आंकड़ा बन गया है।
चार मंत्री नाराजगी के चलते नहीं पहुंचे
मंगलवार रात विभाग बांटे जाने के बाद मुख्यमंत्री ने बुधवार की सुबह कैबिनेट बुलाई तो चार मंत्री नाराजगी के चलते नहीं पहुंचे। मंत्रियों का आरोप है कि मुख्यमंत्री ने जानबूझकर ऐसे समय विभाग बांटे जब आचार संहिता लागू हो गई।
जिन मंत्रियों को नए सृजित विभाग मिले हैं उन्हें समझने में और काम कैसे करेंगे का संकट खड़ा हो गया है। सचिवालय में इन विभागों के लिए अलग से अनुभाग नहीं है। नव सृजित विभाग कैसे कार्य करेंगे इसका अंदाजा न अधिकारियों को है न ही मंत्रियों को।
मुख्यमंत्री अपने बदले वर्जन में सबको साथ लेकर चलने का प्रयास कर रहे थे लेकिन विभागों केबंटवारे ने एक बार फिर मंत्रियों में नाराजगी और गुटबाजी को बढ़ावा दिया है।
लगभग सभी दौरों में साथ इंदिरा
अभी तक मुख्यमंत्री अपनी उत्तराखंडी दीदी इंदिरा ह्दयेश को खुश रखने के लिए कई महत्वपूर्ण कमेटियों की जिम्मेदारी सौंप चुके हैं इतना ही नहीं शुरूआती दिनों में लगभग सभी दौरों में वह साथ दिख रही थीं।
अब विभाग बंटवारे के बाद नाराज इंदिरा ह्दयेश कैबिनेट में न जाकर दिल्ली रवाना हो गई। बताते हैं उन्होंने वहां प्रदेश प्रभारी अंबिका सोनी से मिलकर अपनी शिकायत दर्ज कराई है। अमृता रावत भी उद्यान छीने जाने से नाराज हैं।
मुख्यमंत्री ने हाल ही पॉली हाउस मामले में गड़बड़ी केबाद शायद यह फैसला लिया है। हालांकि सूत्रों का कहना है कि मुख्यमंत्री ने सतपाल महाराज से पीडब्ल्यूडी जैसे महकमा देने का आश्वासन दिया था।
सतपाल महाराज ने मुख्यमंत्री की शान में पढ़े कसीदे
पिछले दिनों सतपाल इस संबंध में मुख्यमंत्री से मिले भी थे। राहुल की रैली में सतपाल महाराज ने मुख्यमंत्री की शान में कसीदे पढ़ राहुल गांधी से कहा था कि 18 घंटे काम कर रहे हैं।
जबकि हरीश रावत को नेता चुने जाने के दौरान सबसे अधिक विरोध महाराज ने जताया था। इतना ही नहीं मुख्यमंत्री बन जाने के बाद कई दिनों तक गढ़वाल की उपेक्षा को लेकर जमकर बयानबाजी भी की। ऐसे में एक बार फिर रिश्तों खटास आनी तय है।
कैबिनेट की बैठक में सरकार केसहयोगी दल यूकेडी के मंत्री और निर्दलीय विधायक दुर्गापाल भी नाराज बताए जा रहे हैं। हालांकि मुख्यमंत्री केलिए ज्यादा परेशानी अपने मंत्रिमंडल की दोनों महिला मंत्रियों को लेकर होगी।