मंत्रियों में विभागों के बंटवारे को लेकर भले ही नाराजगी हो लेकिन उत्तराखंड में हरीश रावत ने अपने अनुभव और जमीनी आवश्यकताओं को देखते हुए 14 नए विभाग सृजित किए हैं।
ये हैं नए विभाग
नए सृजित विभागों पर राज्यपाल की मुहर भी लग गई है। नए विभागों में सीमांत क्षेत्र विकास विभाग, पर्यावरण एवं ठोस अपशिष्ट निवारण विभाग, प्रक्षेत्र विकास एवं प्रबंधन विभाग, भेड़ एवं बकरी पालन विभाग, वर्षा जल संग्रहण विभाग, पर्वतीय ग्रामों में चकबंदी विभाग, पिछड़ा क्षेत्र विकास विभाग, तीर्थाटन प्रबंधन एवं धार्मिक मेला विभाग, छात्र कल्याण विभाग, राजीव गांधी शहरी आवास विभाग, चारा एवं चारागाह विकास विभाग, ग्राम्य तालाब विकास विभाग, पेयजल एवं स्वच्छता विभाग शामिल किए गए हैं। पेयजल एवं स्वच्छता विभाग पूर्व में सृजित पेयजल विभाग के स्थान पर सृजित किया गया है।
नया काम भी सौंप दिया मंत्रियों को
मुख्यमंत्री हरीश रावत भले ही मंत्रियों को खुश न कर पाए हों पर विभागों के बंटवारे के जरिए इसकेलिए मजबूर तो कर ही दिया कि मंत्रियों को किन विभागों को अलग से तवज्जो देनी होगी।
बड़ी सफाई से रावत ने अपनी चिंता में शामिल मामलों को विभागों की शक्ल देकर मंत्रियों के लिए भी अलग से काम करने की राह खोल ही दी। हरक सिंह को कृषि तो दिया ही गया पर साथ में पर्वतीय गांवों में चकबंदी अलग से विभाग भी दिया गया।
चकबंदी वैसे राजस्व का काम है पर ठीक इससे पहले रावत चकबंदी अपनाने वाले हर पर्वतीय गावं को एक करोड़ रुपये देने का ऐलान कर चुके हैं। पर्वतीय क्षेत्रों में अभी तक चकबंदी हुई ही नही है और खेती को बचाने के लिए अब इसे महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
भूमि कटाव पर चिंता
रावत खुद भी पर्वतीय जिलों में भूमि कटाव पर चिंता जताते रहे हैं और यह मानते रहे हैं कि भूमि कटाव खेती को बढ़ाकर ही कम किया जा सकता है। अब जरा यशपाल आर्य की तरफ आएं।
आर्य खासे चिंतित होगे कि आखिर यह ग्रामीण सड़कें और ड्रेनेज है क्या बला। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत प्रदेश में विभिन्न चरणों में करीब पांच हजार किलोमीटर सड़क बननी है। यह सारी सड़कें गांव की ही हैं।
सड़क टूटने का एक बड़ा कारण सड़क के साथ-साथ पानी की निकासी की व्यवस्था न करना है। लिहाजा आर्य को अब इस इस बात की भी चिंता करनी होगी कि सड़क बने और इस बात की भी कि सड़कों के साथ ही निकासी की व्यवस्था हो।
मंत्री प्रसाद नैथानी को पेयजल के साथ पेयजल स्वच्छता भी
पंचेश्वर बांध का एक हिस्सा उत्तराखंड ही है और नेपाल और केंद्र सरकार की बातचीत में उत्तराखंड भी हमेशा शामिल रहता है।
ऐसे में टिहरी बांध की तरह बाद में लड़ने की बजाय पहले से ही इस बांध को लेकर हो रही बातचीत में पहले क्यों न शामिल हुआ जाए।
इसी तरह मंत्री प्रसाद नैथानी को पेयजल के साथ पेयजल स्वच्छता से भी जूझना होगा। मौसम परिवर्तन पर केंद्र के आठ राष्ट्रीय मिशन में एक सेफ ड्रिंकिंग वाटर का भी है।
इसी तरह मैदानी इलाकों में तालाब विकास के जरिए भूजल के गिरते स्तर से मंत्री सुरेंद्र राकेश को जूझना होगा।
यूं ही नहीं बना भेड बकरी पालन मंत्रालय
लीक से अलग हटकर चलने की बानगी रावत ने बजट सत्र के दौरान ही पेश कर दी थी। रावत ने भेड़-बकरी पालन मंत्रालय बनाने का ऐलान किया था। इसको लेकर मजाक भी किया गया कि भेड़ मंत्री अब प्रदेश में कौन होगा।
भेड़-बकरियों की बात करते समय यह बिलकुल ही भुला दिया जाता है कि प्रदेश में लाइवस्टॉक जनसंख्या करीब 50 लाख है। पौड़ी गढ़वाल में इनकी संख्या सबसे अधिक है।
और पिथौरागड़ और अल्मोड़ा दो ऐसे जिले हैं जहां भेड़-बकरियों की संख्या पूरे प्रदेश में सबसे अधिक है। जाहिर है कि इन दो जिलों की आजीविका का एक मुख्य स्रोत भेड़-बकरियां हैं।
पौड़ी में चारागाह मात्र पांच प्रतिशत
पौड़ी में पशुओं की संख्या भले ही अधिक हो पर अन्य जिलों की तुलना में पौड़ी में चारागाह मात्र पांच प्रतिशत है। जाहिर है कि एक अलग से मंत्रालय बनाकर रावत ने अपने मूल जिले को अपने से जोड़ा भी था और मंत्रियों को आंख तरेरने तक का मौका नहीं दिया।