भूतल सूखा रहा, लेकिन पहली मंजिल पर बाढ़ आ गई। है ना गजब। जून 2013 में आई आपदा के बाद जिले में यही गजब हुआ है राहत राशि वितरण में।
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सूचना का अधिकार के तहत मांगी गई जानकारी में मुआवजा बांटने में बंदरबांट का खुलासा हुआ है। दोमंजिला मकानों के मालिक ऐसे लोगों को हजारों रुपए मुआवजा दे दिया गया, जो पहली मंजिल पर रहते हैं।
और आपदा के दौरान मकान के भूतल में भी पानी नहीं भरा। खास बात यह रही कि मुआवजे के लिए पानी पहली मंजिल पर भरना बताया गया।
चेक पाने वालों का न नाम सही न पता
यही नहीं, जिन मकानों के पते मुआवजा सूची में दर्ज हैं, उनके अड़ोस-पड़ोस में कोई दूसरा मकान आपदा प्रभावित नहीं था। दूसरी ओर, राहत राशि के चेक पाने वाले कई लोगों के नाम-पते भी सही नहीं हैं। पूरा खेल तीन करोड़ रुपये का है।
मानकों के अनुसार यह चेक उन आपदा प्रभावितों को दिए जाने थे, जिनके घर बह गए हों या एक सप्ताह से अधिक समय तक जलभराव की स्थिति बनी हो।
जिले को दैवी आपदा मद में तीन करोड़ 35 लाख रुपए मिले। लेकिन इनमें से दो करोड़ 96 लाख 51 हजार 193 रुपए राहत के नाम पर बांटे गए हैं।
इसमें असल प्रभावितों को राहत राशि न देकर कई ऐसे लोगों को राहत राशि दी गई है, जो इससे प्रभावित ही नहीं हुए।
आरटीआई से हुआ खुलासा
तेग बहादुर रोड हाईडिल कॉलोनी आराघर निवासी मोहन सिंह नेगी की ओर से आरटीआई के तहत मांगी गई जानकारी में यह खुलासा हुआ है।
नेगी ने तहसील कार्यालय से नेहरू कॉलोनी वार्ड 33 व 34 में आपदा राहत चेक के संबंध में सूचना मांगी थी। वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी तहसील सदर ने आपदा प्रभावितों को बांटे गए चेकों की जो सूची उपलब्ध कराई है।
उसमें कई नाम ऐसे हैं, जिनके दोमंजिला मकान हैं। इस क्षेत्र में जल निकासी की बेहतर व्यवस्था है, सीवर लाइन भी है। ऐसे में यहां जलभराव की आशंका बहुत कम है।
हैरानी की बात तो यह है कि स्थानीय भाजपा पार्षद ने भी आपदा राहत का चैक लिया है, जबकि उनके घर के पास का कोई दूसरा घर आपदा प्रभावित नहीं था।
जो आपदा प्रभावित नहीं थे उन्हें भी दे दिया चेक
नेहरू कॉलोनी ए ब्लॉक में 37 लोगों को चैक दिए गए। यहां दो चैक ऐसे हैं, जिनके नाम अलग, लेकिन पते एक ही बताए गए हैं।
बी ब्लॉक में आठ लोगों को चैक मिले, जबकि सी ब्लॉक में एक भी आपदा प्रभावित नहीं रहा। दूसरी ओर, ओल्ड नेहरू कालोनी में मात्र तीन लोगों को चेक मिले हैं।
सवाल यह है कि आपदा आई होती तो यहां प्रभावितों की संख्या बड़ी होती। ऐसे में प्रशासन की प्रक्रिया भी कठघरे में है।
नेहरू कॉलोनी में जसपाल सिंह का दोमंजिला मकान है। मकान के भूतल पर आबकारी विभाग का कार्यालय था, जो कुछ दिन पूर्व शिफ्ट हो चुका है।
जून 2013 में आई आपदा में घर में जलभराव के नाम पर मुआवजा हासिल करने वालों में जसपाल भी शामिल हैं। प्रशासन की ओर से उन्हें 4000 रुपए का चेक दिया गया। जसपाल मकान की पहली मंजिल पर रहते हैं।
जबकि भूतल पर तैनात रहे आबकारी कर्मियों का कहना है कि कार्यालय में कभी पानी भरा ही नहीं था।
एक भवन में एक से अधिक परिवार, भवन स्वामी और किरायेदार भी रह सकते हैं।
ऐसे में यदि किरायेदार का आपदा में कोई नुकसान हुआ हो तो मकान मालिक एवं स्थानीय प्रशासन के सत्यापन के आधार पर निर्धारित शर्तें पूर्व करने पर 25 हजार तक की आर्थिक सहायता दी जाएगी।
भवन की पहली मंजिल पर रहने वालों को आपदा राहत कोष से मदद मिलने की बात गंभीर है। ऐसा हुआ है और पात्र लोग वंचित रह गए हैं तो इसकी जांच कराई जाएगी। - बीवीआरसी पुरुषोत्तम, जिलाधिकारी
मेरे मकान में पानी भर गया था। खुद पटवारी ने रिपोर्ट दी है। धर्मपुर में कई घर भारी बारिश के कारण टूट गए थे। उन्हें मुआवजा मिला है। यह आरोप गलत है कि मैने अपने लोगों को चेक दिलवाए हैं। - नीरू भट्ट, पार्षद
सहायता राशि पार्षद और विधायकों के अनुमोदन पर बांटी गई है। यही वजह है कि कुछ स्थानों पर असल प्रभावितों के बजाए चहेतों को राशि बांट दी गई है। - सीपी उनियाल, वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी