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मायके में 'राजनीति' करेंगी अखिलेश की पत्नी

Tue, 02 Dec 2014 01:47 PM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
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उत्तराखंड में जड़ें जमाने के लिए जूझ रही सपा के नेता चाहते हैं कि प्रदेश में पार्टी को मजबूत करने की जिम्मेदारी यूपी के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की पत्नी डिंपल यादव संभालें।
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प्रदेश अध्यक्ष प्रोफेसर एसएन सचान ने इस बाबत अखिलेश यादव से बात भी की तो बोले कि ‘नेताजी (मुलायम सिंह यादव) से बात कर लीजिएगा। हमारा कहना ठीक नहीं है।’ बुधवार को शहर आ रहे सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव के सामने भी नेता यह बात रखेंगे।

सपा प्रदेश अध्यक्ष सचान ने बताया कि इस संबंध में हाईकमान से भी बात चल रही है। पार्टी नेतृत्व से तीन-चार दिन पहले भी इस बाबत बात हुई थी। वैसे लोकसभा चुनाव के दौरान सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव और मुख्यमंत्री अखिलेश यादव यहां नहीं आए थे।
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सूत्रों का कहना है कि सपा नेतृत्व मानता है कि उसके लिए उत्तराखंड में पैर जमा पाना टेढ़ी खीर है। डिंपल यादव को उत्तराखंड में आगे करने की नेताओं की लगातार अपील का असर दिखता नजर आ रहा है। कार्यक्रमों के बहाने सपा नेता प्रदेश में आवाजाही बढ़ाएंगे।

हरिद्वार, ऊधमसिंह नगर के अलावा दूसरे जिलों का भी दौरा करेंगे। मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और कैबिनेट मंत्री शिवपाल सिंह के बाद सपा मुखिया यहां आएंगे। सचान ने बताया कि मुलायम सिंह यादव 3 दिसंबर को शहर आएंगे।

अपनी नहरों पर फिर सब्र का बांध

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और उत्तराखंड के  मुख्यमंत्री हरीश रावत के बीच सोमवार को बहुप्रतीक्षित मुलाकात की कोई खास बात नहीं रही।

सिंचाई विभाग की परिसंपत्तियों के बंटवारे और सीमावर्ती इलाकों में कानून-व्यवस्था को लेकर यह बैठक काफी अहम समझी जा रही थी। सहमति के बाद भी यूपी के कब्जे से 41 नहरें न छोड़े जाने पर उत्तराखंड अपनी बात सख्ती से न कह सका।

दिसंबर 2013 में केंद्रीय जल संसाधन सचिव की अध्यक्षता में यूपी व उत्तराखंड के अफसरों की बैठक में तय हुआ था कि उत्तराखंड के भीतर की 41 नहरों पर से यूपी अपना कब्जा छोड़ेगा और उत्तराखंड से निकलकर यूपी जाने वाली 8 नहरों को उत्तराखंड यूपी को सौंप देगा।

उत्तराखंड को मिलने वाली 41 में से 28 नहरें हरिद्वार व 13 नहरें ऊधमसिंह नगर में हैं। जनवरी 2014 में उत्तराखंड शासन ने इस बाबत आदेश कर दिया लेकिन उत्तर प्रदेश तकनीकी अड़चन बताकर वादे से मुकर गया।
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इन मुद्दों पर हुई बात

- यूपी के कब्जे वाली 41 नहरें उत्तराखंड को और आठ नहरें यूपी को मिले। शासनादेश होने के बावजूद यह नहीं हो सका।
- 40 वर्षों से जमरानी बांध का मामला लंबित है। दोनों राज्यों के बीच अभी तक कोई सहमति नहीं बन सकी।
- यूपी के कब्जे वाले छह जलाशय उत्तराखंड को मिले, क्योंकि ये जलाशय उत्तराखंड की सीमा में है।
- हरिद्वार में अलकनंदा होटल का जो कि यूपी पर्यटन के अधीन है, वह भी उत्तराखंड को मिलना चाहिए।
- अपराधिक घटनाओं के मद्देनजर डीआईजी या आईजी स्तर के अधिकारियों की दो माह में एक बैठक जरूर हो।
- कोटद्वार से लगे नगीना क्षेत्र में सीवरेज ट्रीटमेंट के लिए यूपी से भूमि आवंटित करे।
- सीमाओं से लगी सड़कों, विशेषकर बिहारीगढ़-मोहड सड़क मार्ग की मरम्मत में भी सहयोग मिले। या इन सड़कों के रखरखाव का अधिकार उत्तराखंड को मिले।
- गंगनहर व कई अन्य नहरों के ऊपर सोलर पैनल लगाने की योजना पर हो काम।
- गंगनहर में वाटर स्पोर्ट्स को शुरू करने पर भी विचार हो।

इन बिन्दुओं पर भी हुई बात
- हरिद्वार में 3321.495 हे., पौड़ी में 119.030 हे., यूएसनगर में 687.420 हे भूमि यूपी सिंचाई विभाग से उत्तराखंड को हस्तांतरित होनी है।
- भीमगौड़ा बैराज-जनपद हरिद्वार
- रामगंगा बांध‘-जनपद पौड़ी
- बैगुल एवं नानकसागर-जनपद ऊधमसिंहनगर
- बनबसा बैराज-जनपद चम्पावत
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