धारी देवी मंदिर के स्थायी मंदिर का निर्माण कार्य मूर्ति को मूल स्थान से अस्थायी मंदिर में शिफ्ट करने के नौ माह बाद भी शुरू नहीं हो पाया। बीते वर्ष मीडिया के समक्ष स्थायी मंदिर का विशाल मॉडल प्रस्तुत किया था।
वर्ष 2014 में बदरीनाथ मंदिर के कपाट खुलने के दिन ही स्थायी मंदिर के उद्घाटन की घोषणा भी की गई थी लेकिन अभी तक स्थाई मंदिर का निर्माण कार्य 10 प्रतिशत भी आगे नहीं बढ़ पाया है।
जनप्रतिनिधियों ने भी नहीं उठाई आवाज
अक्सर चुनावों के समय भावनात्मक वोटों को अपने पक्ष में करने का साधन मठ-मंदिरों तक पहुंच तथा जहां-तहां रो पड़ने का दिखावा कई बार उत्तराखंड में भी दिखता रहा है। धारी देवी मंदिर में पूर्व में एक काबीना मंत्री द्वारा शपथ लिए जाने की घटना भी खासी चर्चित रही थी।
इसके बावजूद नौ माह पूर्व अपने वर्षोँ पुराने मूल स्थल से हटाकर अस्थाई मंदिर में स्थापित की गई धारी देवी के लिए मंदिर के सवाल पर कोई जन प्रतिनिधि ने अभी तक आवाज तक नहीं उठाई है। जबकि नवरात्र के समय हजारों की संख्या में मंदिर में श्रद्धालु दर्शनों के लिए पहुंचे हैं।
ग्रामीण कर रहे विरोध
धारी देवी मंदिर के निर्माण का विरोध धारी गांव के ग्रामीण कर रहे हैं। उनका कहना है कि हमारे गांव के लिए न तो पुल बना और न ही सभी ग्रामीणों को कंपनी ने निर्धारित मुआवजे का पैकेज दिया है।
ग्रामीणों का कहना है कि जब तक सभी ग्रामीणों का भुगतान नहीं हो जाता, मंदिर निर्माण नहीं करने दिया जाएगा।