जिलाधिकारी और एसएसपी को धरना स्थल पर भेजना सेफ्टीवॉल्व का काम कर गया
आंदोलन की तरुणाई और युवाओं के आक्रोश को समझने में कहीं चूक हुई। सरकार ने पेपर लीक को लेकर जो कार्रवाई और फैसले लिए, उचित तो कहे जा सकते थे लेकिन युवाओं ने उसे सिरे से नकार दिया। आंदोलन में तीखापन आने के बाद सरकार का देहरादून के जिलाधिकारी और एसएसपी को धरना स्थल परेड ग्राउंड भेजना सेफ्टीवॉल्व का काम कर गया। युवाओं ने सरकार और प्रशासन को खरी-खरी सुनाकर अपना गुबार निकाला।
सरकार के सलाहकार कतई नहीं चाहते थे मुख्यमंत्री सीधे तौर पर आगे आएं, लेकिन बीते तीन दिनों में मुख्यमंत्री के बयानों में युवाओं के प्रति हमदर्दी और चिंता का भाव झलकने लगा था। मुख्यमंत्री ने एक दिन पूर्व फैसला कर लिया था कि सीबीआई जांच के लिए भी तैयार हैं।
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सलाहकारों पर उठते सवालों के बीच सोमवार सुबह सीएम ने उनसे कोई सलाह नहीं ली, नतीजे की परवाह किए बिना खुद धरना स्थल पर पहुंचने का फैसला कर लिया। मुख्यमंत्री की फ्लीट में शामिल एक अधिकारी को ही इसकी सूचना थी शेष स्टाफ को परेड ग्राउंड पहुंचने से कुछ दूरी पर ही पता चला। सीएम के साथ धरना स्थल पर पहुंचे विधायक खजानदास को भी परेड ग्राउंड के समीप पहुंचकर सीएम के प्लान का पता चला। मुख्यमंत्री उन्हें यूं ही गाड़ी में बैठाकर इस मिशन पर निकले थे।