वेतन विसंगतियों पर पुलिसकर्मियों का आक्रोश थामने में सरकार का पूरा सिस्टम कन्फ्यूज है। इस मसले पर मुख्य सचिव राकेश शर्मा के स्टैंड के उलट शनिवार को डीजीपी बीएस सिद्धू ने दावा किया कियदि समस्या का हल 31 दिसंबर तक नहीं करवा पाए तो पद छोड़ देंगे।
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डीजीपी, शनिवार को मीडिया चैनलों के जरिए पुलिसकर्मियों को संबोधित कर रहे थे। चार दिन पहले ही मुख्य सचिव ने दो टूक कहा था कि न तो एरियर दिया जाएगा और न किसी के खिलाफ कार्रवाई होगी।
अजब बात है कि इन दोनों वरिष्ठ अफसरों के स्टैंड से हटकर आईजी गढ़वाल रेंज संजय गुंज्याल अनुशासनहीनता करने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की बात कहते हैं।
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मुख्यमंत्री हरीश रावत समस्या का कोई ठोस समाधान तलाशने की बजाय, इसके लिए भाजपा को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। इतने संवेदनशील मसले पर सरकार-नौकरशाही में तालमेल और स्पष्ट नीति के अभाव का नतीजा यह निकला कि राजनीतिक पार्टियां पुलिसकर्मियों के समर्थन में सरकार पर हमलावर हो गईं हैं।
उकसाने वाले राजनीतिक दलों को लिया आड़े हाथ
ताजा घटनाक्रम में पुलिस महानिदेशक बीएस सिद्धू ने टीवी चैनल के जरिए पुलिसकर्मियों को दिए करीब 18 मिनट के अपने संदेश में कहा कि वह कोई आश्वासन देने की स्थिति में नहीं हैं, लेकिन इतना कह सकते हैं कि उनकी मांगों की पैरोकारी करने में कोई कसर नहीं छोड़ी जाएगी।
31 दिसंबर तक इस मामले को सुलझाना उनकी प्राथमिकता है, क्योंकि एक जनवरी 2016 से सातवें वेतन आयोग की संस्तुति लागू होनी है। मुख्यमंत्री भी उनके मुद्दे पर गंभीर हैं। कई दौर की बात हो चुकी है। शासन को फिर नया प्रस्ताव बनाकर भेज रहे हैं, ताकि कुछ न कुछ लाभ मिल सके।
उन्होंने छठे वेतन आयोग की सिफारिश को लेकर हुए फैसलों पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने पुलिस को उकसाने वालों और राजनीति दलों को भी आडे़ हाथों लिया।
बोले, पुलिस में भी हैं कुछ अराजक तत्व
उन्होंने कहा कि डीजीपी होने के नाते वह पुलिस कर्मचारियों के अभिभावक हैं। पुलिस कर्मचारियों को किसने बहकाया और उकसाया है, यह बात अलग है, लेकिन पुलिसकर्मियों का अनुशासनहीनता की राह पर चलना किसी के हित में नहीं है।
डीजीपी ने कहा कि बाहरी तत्वों के अलावा पुलिस विभाग में भी कुछ अराजक तत्व हैं, जो निजी स्वार्थ के लिए पुलिस के अनुशासन को तोड़ना चाहते हैं। उन पर भी नजर है। समय के साथ उन पर कार्रवाई का शिकंजा कसा जाएगा।
जानकारों का मानना है कि सरकार और नौकरशाहों के बीच जिस तरह से तालमेल का अभाव दिख रहा है, वह मामले को और उलझाएगा। शनिवार शाम तक 31 अगस्त को पुलिसकर्मियों के परिजनों द्वारा परेड ग्राउंड की तरफ कूच करने की चर्चाओं पर विराम नहीं लग पाया था।
वेतन विसंगति के संबंध में नया प्रस्ताव बनाकर शासन को भेज रहे हैं। पुलिस कर्मचारियों की मांगों का 31 दिसंबर तक हल नहीं कराया पाया तो पद छोड़ दूंगा। -बीएस सिद्धू , डीजीपी (22 अगस्त को चैनलों पर)
एरियर न एक्शन रिवाइज्ड ग्रेड के आधार पर एरियर देना संभव नहीं है। किसी पुलिस कर्मचारी के खिलाफ किसी तरह की कार्रवाई का इरादा नहीं है। -राकेश शर्मा, मुख्य सचिव (19 अगस्त को देहरादून में प्रेस कांफ्रेंस के दौरान)
भाजपा दोषी पुलिस कर्मचारियों की वेतन विसंगति के संबंध में साल 2011 में ही निर्णय हो चुका था कि एरियर नहीं दिया जाएगा। यह निर्णय लेने वाले ही अब वर्तमान सरकार को पुलिस कर्मचारियों का दुश्मन साबित करने पर तुले हैं। पुलिस फोर्स अनुशासित होती है। क्या उन्हें उकसाकर राजनीतिक दायित्व पूरे हो सकते हैं? हरीश रावत, सीएम (21 अगस्त, देहरादून)
बर्खास्त होंगे अनुशासनहीन पुलिस कर्मचारियों के विरोध का तरीका गलत है। पुलिस महकमे में यह सब चलने वाला नहीं है। इस तरह के पुलिस वालों को चिह्नित कर बर्खास्त करेंगे और जेल भी भेजे जाएंगे। -संजय गुंज्याल, आईजी (21 अगस्त को हरिद्वार में, मुख्य सचिव के कार्रवाई नहीं करने के बयान के बाद)