राज्य मानवाधिकार आयोग के समक्ष उत्तराखंड डीजीपी के प्रतिनिधियों व निलंबित दारोगा निर्विकार ने अपने-अपने पक्ष रखे। आयोग अब मामले की अगली सुनवाई 15 मार्च को करेगा।
निलंबित दरोगा निर्विकार सिंह के उत्पीड़न के मामले में आयोग ने शासन को डीजीपी बीएस सिद्धू के खिलाफ जांच के आदेश दिए थे। इस पर सरकार ने 17 फरवरी को डीजीपी के खिलाफ अपर मुख्य सचिव एस रामास्वामी को जांच सौंपी थी, लेकिन अगले ही दिन डीजीपी आयोग में पहुंचे और रिव्यू पिटीशन दाखिल कर बताया कि जिन शिकायतों की जांच के लिए कहा गया है, उन्हें हाईकोर्ट और सुप्रीमकोर्ट खारिज कर चुका है। इसलिए जांच से पहले उनका पक्ष भी सुना जाए।
इस पर आयोग ने 29 फरवरी की तिथि तय की थी। सोमवार को डीजीपी की ओर से पीएचक्यू में एएसपी ममता बोहरा ने जरूरी दस्तावेज आयोग में प्रस्तुत किए। निलंबित दारोगा निर्विकार ने आयोग के समक्ष दोहराया कि उन्होंने डीजीपी के रिजर्व फारेस्ट जमीन प्रकरण की निष्पक्ष जांच की।
इस वजह से उनके साथ यह व्यवहार किया जा रहा है, अनापशनाप जांचों और गलत तरीके से लंबे समय तक निलंबित रखकर मानवाधिकारों का उल्लंघन किया जा रहा है। दारोगा ने यह भी बताया कि राज्यपाल, आईबी व स्वयं डीजीपी ने उन्हें सम्मानित किया है। निर्विकार ने पुरस्कार से संबंधित प्रमाण-पत्र भी आयोग के समक्ष रखे, लेकिन आयोग ने निर्णय करने के बजाय 15 मार्च की तारीख सुनवाई के लिए तय की है।