पंडित प्रियव्रत शर्मा के अनुसार ग्रहों की चाल और बृहस्पति के चलते शेष बचे संवत में भले ही विवाह कम हों, लेकिन संवत बदलते ही काफी नए मुहूर्त रहने वाले हैं। वर्तमान सीजन में शुद्ध मुहूर्त केवल नौ हैं। हालांकि सामान्य मुहूर्त निकाले जा सकते हैं।
देवशयनी एकादशी इस बार एक जुलाई को पड़ी थी। उसी दिन संतों का चातुर्मास प्रारंभ हो गया था। शास्त्रीय मान्यता है कि शंकराचार्य देव जागरण तक के चार महीनों में यात्रा नहीं करते। नदी पार नहीं करते। वे एक ही स्थान पर रहकर साधना और मानव उत्थान के लिए चिंतन करते हैं।
अन्य साधु संत भी इसी मान्यता का अनुसरण करते हैं। बुधवार को संन्यासियों का चातुर्मास संपन्न हो जाएगा। वैष्णव बैरागियों का चातुर्मास गुरुवार को संपन्न होगा। विष्णु के जागते ही संतगण भी अपनी धार्मिक प्रचार यात्राओं पर चल पड़ेंगे।