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देवस्थानम बोर्ड: सीएम धामी बोले, एक्ट में संशोधन के पक्ष में सरकार, जल्द लिया जाएगा निर्णय

Wed, 21 Jul 2021 11:41 PM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उत्तरकाशी

सार

सीएम धामी ने कहा कि एक्ट को लेकर उच्च स्तरीय कमेटी गठित की जा रही है। यह कमेटी सभी से चर्चा के बाद संस्तुति देगी। इसी के आधार पर निर्णय लिया जाएगा।
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सीएम पुष्कर सिंह धामी - फोटो : एएनआई
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विस्तार
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उत्तरकाशी पहुंचे मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने पत्रकारों से वार्ता के दौरान कहा कि सरकार देवस्थानम बोर्ड एक्ट में संशोधन के पक्ष में है। इसके लिए उच्च स्तरीय कमेटी गठित की जा रही है। यह कमेटी सभी से चर्चा के बाद संस्तुति देगी। इसी के आधार पर निर्णय लिया जाएगा।

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सीएम ने कहा कि तीर्थ पुरोहित लगातार देवस्थानम बोर्ड को लेकर उनसे बात कर रहे हैं। धामी ने कहा कि बोर्ड को लेकर तीर्थ पुरोहितों व हक हुकूकधारियों में संशय बना हुआ है। उन्हें लग रहा है कि सरकार मंदिरों पर अपना अधिकार करना चाह रही है।

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सीएम ने कहा कि सरकार का उद्देश्य मंदिरों व धामों में बेहतर व्यवस्थाएं बनाना है। राज्य के लिए चारधाम यात्रा आर्थिक रूप से सबसे महत्वपूर्ण है। राज्य के सभी वर्गों का हित और विकास इससे जुड़ा है।

उन्होंने कहा कि मेरा मानना है कि इस आर्थिक गतिविधि को नया आयाम देते हुए स्थानीय व्यवसायियों व हक हुकूकधारियों के हकों पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़ने दिया जाए। सभी हितधारकों से हमने विचार विमर्श किया है। हमारी सरकार देवस्थानम बोर्ड को लेकर सकारात्मक परिवर्तन के पक्ष में है।

उच्चस्तरीय कमेटी बनते ही स्थगित कर देंगे धरना : सेमवाल

गंगोत्री धाम के तीर्थ पुरोहितों ने सीएम पुष्कर सिंह धामी के चारधाम देवस्थानम बोर्ड पर पुनर्विचार का आश्वासन दिए जाने का स्वागत किया है। गंगोत्री मंदिर समिति के अध्यक्ष सुरेश सेमवाल ने कहा कि बोर्ड पर पुनर्विचार के लिए उच्चस्तरीय कमेटी का गठन होते ही वह आंदोलन समाप्त कर देंगे। 

गंगोत्री व यमुुुनोत्री धाम में तीर्थ पुरोहित चारधाम देवस्थानम बोर्ड के खिलाफ करीब 40 दिन से धरने पर हैं। बुधवार को श्रीपांच गंगोत्री मंदिर समिति के अध्यक्ष सुरेश सेमवाल के नेतृत्व में गंगोत्री धाम के तीर्थपुरोहितों ने सीएम से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा।

मंदिर समिति के अध्यक्ष सुरेश सेमवाल ने कहा कि नवनियुक्त सीएम ने उन्हें बोर्ड पर पुनर्विचार के लिए उच्चस्तरीय कमेटी के गठन का आश्वासन दिया है। इसका सभी तीर्थपुरोहित स्वागत करते हैं। इस मौके पर पुरोहितों ने सीएम को ज्ञापन भी सौंपा।

केदारनाथ में मुर्दाबाद के नारे न लगाएं आंदोलनकारी : पोस्ती

देवस्थानम बोर्ड के सदस्य व केदारनाथ के वरिष्ठ तीर्थ पुरोहित श्रीनिवास पोस्ती ने चारधाम मंदिर परिसर में आंदोलन कर रहे लोगों के मुर्दाबाद के नारे लगाने पर आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि लोकतंत्र में सभी को अपनी बात रखने का अधिकार है लेकिन मंदिर परिसरों में जहां देवी-देवताओं की पूजा-अर्चना के साथ आह्वान होता है। वहां, मुर्दाबाद के नारे शोभनीय नहीं हैं। 

उन्होंने कहा कि सभी को अपनी बात रखने का हक है, लेकिन धार्मिक मान्यताओं का पालन व धामों के महत्व को ध्यान में रखते हुए अपशब्द वाले नारे नहीं लगाए जाने चाहिए। उन्होंने आंदोलनकारियों से अपील की कि वो उनकी बात सरकार तक पहुंचाने के लिए हरसंभव सहयोग करेंगे। दूसरी तरफ केदारनाथ में देवस्थानम बोर्ड के विरोध में तीर्थपुरोहितों का आंदोलन जारी रहा। उन्होंने मांगपूर्ति तक आंदोलनरत रहने की बात कहते हुए सरकार पर उपेक्षा का आरोप लगाया है।

उन्होंने कहा कि बोर्ड के नाम पर सरकार ने तीर्थपुरोहितों व हक-हकूकधारियों को हाशिए पर रखने का काम किया गया है, जो बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। 

त्रिवेंद्र कर रहे देवस्थानम बोर्ड का समर्थ

पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत अपनी सरकार के समय लिए गए चारधाम देवस्थानम बोर्ड का समर्थन कर रहे हैं। त्रिवेंद्र सरकार ने चारधामों में अवस्थापना विकास और यात्रियों की सुविधा व सुरक्षा के लिए बदरीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री, यमुनोत्री धाम के साथ 51 मंदिरों को शामिल कर देवस्थानम बोर्ड का गठन किया था। तीर्थ पुरोहितों व हकहकूकधारियों के भारी विरोध के बावजूद भी वे अपने फैसले पर अडिग रहे। सत्ता से बाहर होने के बाद भी वे देवस्थानम बोर्ड के फैसले का समर्थन कर रहे हैं। प्रदेश में नेतृत्व परिवर्तन के बाद तीरथ सरकार ने भी तीर्थ पुरोहितों को देवस्थानम बोर्ड पर पुनर्विचार करने की घोषणा की थी। लेकिन वे कुछ नहीं कर पाए। 

15 जून 2020 को अस्तित्व में आया था बोर्ड
पूर्व त्रिवेंद्र सरकार के समय वर्ष 2019 में पहली बार देवस्थानम प्रबंधन बोर्ड विधेयक विधानसभा पटल में रखा गया था। विधानसभा में विधेयक पारित कर 15 जून 2020 को बोर्ड की अधिसूचना जारी की गई। उस समय भी चारधामों के तीर्थ पुरोहितों व हकहकूकधारियों ने भारी विरोध किया। लेकिन सरकार अपने फैसले से पीछे नहीं हटी। तीरथ सरकार ने देवस्थानम बोर्ड पर पुनर्विचार करने का एलान किया था। इसी बीच देवस्थानम बोर्ड में सदस्य भी नामित करने के आदेश जारी कर दिए। इससे तीर्थ पुरोहितों विरोध किया।
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देवस्थानम बोर्ड को भंग कर पुरानी व्यवस्था को बहाल करे सरकार: धस्माना

मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के उत्तराखंड चारधाम देवस्थानम् बोर्ड अधिनियम में सकारात्मक परिवर्तन के बयान पर कांग्रेस ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। प्रदेश उपाध्यक्ष सूर्यकांत धस्मान ने मीडिया को बयान जारी कर कहा है कि भाजपा सरकार पहले तो यह तय कर ले कि वह करना क्या चाहती है। एक तरफ उनके पूर्व मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत का कहना है कि एक्ट में कोई भी परिवर्तन संभव नहीं है, वहीं दूसरी तरफ वर्तमान मुख्यमंत्री कह रहे हैं कि इसमें प्रभावी विचार-विमर्श के बाद सकारात्मक परिवर्तन किया जाएगा। बीजेपी सरकार का अपना ही रूख साफ नहीं है। इस तरह की बयानबाजी करके भाजपा नेता पंडा पुरोहितों को बरगलाने का काम कर रहे हैं और कुछ नहीं। धस्माना ने कहा कि कांग्रेस मांग करती है कि सरकार अध्यादेश लाकर बोर्ड को तुरंत भंग करे और पुरानी व्यवस्था को कायम करने का काम करे।

दो साल में सरकार नहीं समझा पाई देवस्थानम बोर्ड से क्या सुधार होगा : हरीश
पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा कि देवस्थानम प्रबंधन बोर्ड के कुछ लोग पक्ष में हैं तो एक बड़ी संख्या विरोध में खड़ी है। सरकार पिछले दो साल में राज्य के लोगों को यह नहीं समझा पाई है कि देवस्थानम बोर्ड बनाने से मंदिरों की व्यवस्था में क्या सुधार आएगा। इससे राज्य को क्या फायदा होगा। अभी तक मैं यह नहीं समझ पाया हूं कि देवस्थानम बोर्ड बनाने से चारधामों में कौन सा क्रांतिकारी परिवर्तन आया है। 

रावत ने फेसबुक पेज पर ट्वीट में लिखा है यदि सरकार आय के लिए पुरानी परंपरा को बदल रहे हैं तो वो न्याय संगत नहीं है। उसके पीछे चारधाम यात्रा को सुगम और सुचारू बनाने की सोच होनी चाहिए। साथ ही यात्रियों का हित सर्वोपरि माना जाना चाहिए। इसके बाद स्थानीय लोगों का हित सर्वोपरि होना चाहिए। केवल जिद से सरकारें नहीं चलती हैं।  सरकार ने एक प्रयोग किया जिसके नतीजे बहुत लाभकारी नहीं दिखाई दे रहे हैं।

ऐसे में  राज्य की जनता के एक हिस्से के ऊपर अपने विचार व निर्णय को थोपना सरकार के लिए उचित नहीं है। पहले से ही मंदिर कमेटियां बनी हुई हैं। सरकार उनकी कार्यप्रणाली को बेहतर और सुधार कर सकती है। आय अर्जन के लिए सरकार को कुछ और तरीके निकाल कर उसे मंदिर कमेटी और तीर्थ पुरोहितों की संस्था के साथ मिलकर क्रियान्वित करे। लेकिन अभी तक मैं यह नहीं समझ पाया हूं कि देवस्थानम बोर्ड बनने से कौन सा क्रांतिकारी परिवर्तन हमारी चारधाम यात्रा में आया है।
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