उत्तराखंड के देहरादून जिले के जौनसार बावर जनजातीय क्षेत्र में सामाजिक बदलाव की बयार के बीच कालसी तहसील स्थित सिमोग मंदिर का चार सदी पुराना इतिहास बदल गया। जिस किसी ने भी इस मामले के बारे में सुना उसने यहां के लोगों की सोच को सलाम किया।
रविवार को मंदिर की देव पालकियों ने जैसे ही दलित गांव सराड़ी में प्रवेश किया, पूरा गांव देवताओं के उद्घोष से गूंज उठा। हजारों स्थानीय लोग इस अलौकिक पल के साक्षी बने।
गांव में एक साथ तीन-तीन देव पालकी देख गांव के लोगों की खुशी का ठिकाना नहीं रहा। जातपात का भेदभाव भूलकर सभी ने देवताओं की स्तुति की और आशीर्वाद लिया। सराड़ी गांव में धार्मिक अनुष्ठान में खत विशायल, बाना और सिलगांव के लोग शामिल हुए।