जिलों से सहयोग न मिलने पर आयोग अध्यक्ष नाराज
बैठक में यह मुद्दा भी प्रमुखता से उठा कि ओबीसी सर्वेक्षण के मामले में जिलों से अपेक्षित सहयोग नहीं मिल पा रहा है। शासन स्तर से जिलाधिकारियों को इस संबंध में निर्देश दिए गए हैं कि वह जिले में कार्यरत विभिन्न विभागों के अधिकारियों के साथ मिलकर सर्वेक्षण कराएं। इस पर आयोग के अध्यक्ष ने नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि अभी तक शहरी विकास व पंचायती राज विभाग के कर्मचारियों के अलावा विभिन्न विभागों के कार्मिकों, आशा कार्यकर्ताओं, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं के लिए मानदेय आदि की व्यवस्था भी तय नहीं की गई है।
सर्वे के बाद ही होगा निकायों का चुनाव
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के तहत राज्य के सभी निकायों में ओबीसी का सर्वेक्षण ट्रिपल टेस्ट के माध्यम से हो रहा है। इस सर्वेक्षण की रिपोर्ट आने के बाद ही सरकार निकायों में चुनाव करा सकती है। रिपोर्ट के आधार पर ही तय होगा कि किस निकाय में ओबीसी को कितना आरक्षण मिलेगा।
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आयोग ने की राजनीतिक दलों से बातचीत
एकल सदस्यीय समर्पित आयोग ने ओबीसी सर्वेक्षण का लेकर दो दिन पहले पंचायती राज निदेशालय के सभागार में राजनीतिक दलों के साथ बैठक बुलाई गई थी। अपर सचिव एवं एकल सदस्यीय आयोग के सदस्य सचिव ओंकार सिंह ने बताया कि इस बैठक में ओबीसी आरक्षण को लेकर राजनीतिक दलों से बातचीत की गई। उनके सुझाव लिए गए। बैठक में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट के प्रतिनिधि पुनीत मित्तल, कांग्रेस अध्यक्ष करन माहरा के प्रतिनिधि सूर्यकांत धस्माना शामिल हुए। वहीं बसपा, सीपीआई, सीपीआई एम, नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी के प्रतिनिधि भी सुझाव देने पहुंचे। नेशनल पीपुल्स पार्टी और ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस से कोई प्रतिनिधि बैठक में शामिल नहीं हुआ।