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उत्तराखंड में मेट्रो का सपना अभी नहीं होगा पूरा, करना होगा इंतजार

Sat, 03 Sep 2016 10:47 AM IST
संजय त्रिपाठी/ अमर उजाला, देहरादून
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मेट्रो - फोटो : amar ujala
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उत्तराखंड में मेट्रो अभी दूर की कौड़ी है। यहां उत्तराखंड मेट्रो कॉरपोरेशन के प्रबंध निदेशक पद के लिए आए तीनों आवेदक प्रदेश के मुख्य सचिव शत्रुघ्न सिंह के सवालों की कसौटी पर खरे नहीं उतरे। इसके बाद अब नए सिरे से इस पद के लिए आवेदन मंगाए जाएंगे। साथ ही इस पद के लिए कुछ नए मानक और बनाए जाएंगे।
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बीते दिनों मुख्यमंत्री ने प्रदेश में मेट्रो चलाने की घोषणा की थी। आईआईटी रुड़की की मदद से मेट्रो को देहरादून, हरिद्वार, ऋषिकेश समेत अन्य शहरों में चलाए जाने की तैयारी है। इसके लिए उत्तराखंड मेट्रो रेल कॉरपोरेशन की स्थापना की जानी है। वहीं, मेट्रो का खाका खींचने के लिए विशेषज्ञों की नियुक्ति भी होनी है।

इसे देखते हुए कॉरपोरेशन के महाप्रबंधक पद के लिए बीते दिनों आवेदन मांगे गए थे। जिनमें पूर्व में मेट्रो परियोजना की स्थापना और संचालन का अनुभव अनिवार्य किया गया था।
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सूत्रों के मुताबिक इस पद के लिए तमाम आवेदन आए, जिनमें डीएमआरसी और कोलकाता मेट्रो के संचालन से जुड़े रहे एचके शर्मा और डीएमआरसी से जुड़े रहे एक अन्य अधिकारी सहदेव सिंह समेत एक अन्य आवेदन को इंटरव्यू के लिए बुलाया गया। करीब 15 दिन पहले नई दिल्ली में मुख्य सचिव ने इन सभी से मुलाकात के दौरान तमाम सवाल-जवाब किए।

कई घंटे तक चली चर्चा के बावजूद तीनों में से एक भी आवेदक यहां के लिए मुफीद नहीं पाया गया। मुख्य सचिव ने तीनों ही आवेदन किनारे करके अब नए सिरे से विज्ञापन जारी करने के निर्देश दिए हैं।

मेट्रो मैन से मुख्य सचिव ने की चर्चा

ई श्रीधरन - फोटो : amar ujala
मुख्य सचिव शत्रुघ्न सिंह ने वर्ष 2018 में होने वाले नेशनल गेम्स को देखते हुए प्रदेश में जल्द से जल्द मेट्रो का कार्य शुरू करने के लिए मेट्रो मैन श्रीधरन से चर्चा की है। बातचीत में उन्होंने उत्तराखंड मेट्रो के संचालन के लिए किसी उचित व्यक्ति का नाम सुझाने को कहा है। श्रीधरन ने जल्द ही इस बारे में उपयुक्त व्यक्ति की तलाश करके सूचित करने का भरोसा दिलाया है।

मेट्रो ट्रांयगल घटाएगा सड़कों का लोड
मेट्रो प्रोजेक्ट को शासन से हरी झंडी मिल चुकी है। इसका जिम्मा संभाल रहे एमडीडीए ने प्रोजेक्ट का ब्ल्यू प्रिंट एक निजी कंपनी ने तैयार करवाया है। कंपनी ने प्रत्येक किलोमीटर पर होने वाले खर्च का ब्यौरा भी सौंपा है। देहरादून से ऋषिकेश और हरिद्वार हर दिन हजारों यात्री आते-जाते हैं। इन दो रूटों पर यात्रा का जरिया बस ही है, जो बहुत सुविधाजनक नहीं है। वहीं, ट्रैफिक जाम के कारण वर्किंग क्लास लोगों का समय भी बर्बाद होता है।

पहले देहरादून से हरिद्वार तक मेट्रो लाइन का प्लान था, जिसे बाद में कॉरिडोर का रूप देते हुए ऋषिकेश तक विस्तार दिया गया। अब एमडीडीए भू-उपयोग के साथ ही प्रोजेक्ट की लागत से शासन को अवगत कराएगा। इसके बाद डीपीआर बनेगी और फिर सरकार की अंतिम मुहर लगेगी।
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हर प्रमुख कस्बे से जुड़ेगी मेट्रो

मेट्रो
दून से ऋषिकेश जाने वाली मेट्रो के रूट में तमाम प्रमुख कस्बे भी जुड़ेंगे। प्लानिंग के मुताबिक दून से चलकर मेट्रो ट्रेन मोहकमपुर, हर्रावाला, डोईवाला, भानियावाला, रानीपोखरी होते हुए ऋषिकेश जाएगी। दूसरा रूट भानियावाला से लालतप्पड़, छिद्दरवाला, नेपाली फॉर्म, रायवाला होते हुए हरिद्वार जाएगा।

एमडीडीए अधिकारियों के मुताबिक अगले चरण में दून से विकासनगर और हरिद्वार से रुड़की तक मेट्रो रूट का विस्तार किया जाएगा। सभी कस्बों को इससे जोड़ने के लिए कई स्टेशन बनाए जाएंगे। मेट्रो में भूमि अधिग्रहण की भी ज्यादा जरूरत नहीं होती है। जहां भूमि नहीं मिलती है, वहां इसका अंडर ग्राउंड निर्माण किया जाता है।
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