तीन तलाक पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर देहरादून के उलमा ने बेबाकी से अपनी राय दी है। आगे जानिए क्या कहा उन्होंने...
उनका कहना है कि वह कोर्ट का सम्मान करते हैं। कहा कि कानून बनाने में भारत सरकार को मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड से भी चर्चा करनी चाहिए, साथ ही शरीयत का भी ध्यान रखा जाना चाहिए। उन्होंने एक साथ तीन तलाक को बड़ा गुनाह बताते हुए मुसलमानों से इससे तौबा करने की अपील भी की।
सरकार को चाहिए कि वह तीन तलाक के मामले में कानून बनाने के दौरान मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड से भी चर्चा करे। तलाक का मामला धार्मिक है। वैसे इस्लाम में तीन तलाक की मनाही है।
-मोहम्मद अहमद कासमी, शहर काजी, देहरादून
बड़े अफसोस की बात है कि तलाक का मामला कोर्ट तक गया। कोर्ट का जो फैसला आया है, वो सराहनीय है। महिलाओं के हित में है। जैसे तीन बार निकाह, निकाह, निकाह कहने से निकाह नहीं होता, ऐसे ही तलाक, तलाक, तलाक कहने से तलाक नहीं होना चाहिए।
-शिया इमाम मौलाना शहंशाह हुसैन जैदी