शुक्रवार को इस ट्रेवल मार्ट का शुभारंभ अपर निदेशक पर्यटन पूनम चंद व उप निदेशक पर्यटन योगेंद्र गंगवार ने किया। 12 मार्च से 14 मार्च तक होने वाले इस कार्यक्रम का मकसद लोगों को एक साथ लाना और घरेलू पर्यटन के साथ इन बाउंड व आउट बाउंड पर्यटन को एक अलग शैली में बढ़ावा देना है।
उत्तराखंड पर्यटन, गुजरात पर्यटन, सालवुड जंगल रिट्रीट, प्राइड होटल और रिसॉर्ट्स, कंट्री इन होटल और रिसॉर्ट्स, यात्रा मेल के सहयोग से कॉन्क्लेव का आयोजन किया जा रहा है।
अपर निदेशक पूनम चंद ने कहा कि कोरोनाकाल में घरेलू पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए यह एक सराहनीय कदम हैं। इससे उत्तराखंड में आने वाले लोगों को विभिन्न यात्रा पैकेजों के बारे में भी आसानी से जानकारी मिलेगी। गुजरात टूरिज्म के सहायक प्रबंधक संदीप कुमार ने कहा कि एक भारत श्रेष्ठ भारत के तहत, स्टैच्यू ऑफ यूनिटी भारत के सभी लोगों के लिए एक मूल्यवान विरासत है।
इंडियन एसोसिएशन ऑफ ट्रैवल के सुभाष वर्मा ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्थलों पर जाने से पहले लोगों से अपने देश के अनदेखे स्थलों का भ्रमण करना चाहिए। यहां पर्यटन क्षेत्र से जुड़े तमाम संगठनों ने अपने स्टॉल लगाए हैं। इस अवसर पर अजय गुप्ता, एमडी, आईटीएम, अतुल भंडारी, पर्यटन डीटीडीओ, धर्म सिंह सजवाण, यूटीडीबी के प्रशासनिक अधिकारी, लता मोध आदि मौजूद रहे।
महाशिवरात्रि स्नान पर्व ने आर्थिक तंगी से जूझ रहे परिवहन विभाग को संजीवनी दी है। कोरोनाकाल के बाद से ही परिवहन निगम हिचकोले खाकर आगे बढ़ रहा था। शाही स्नान पर निगम की बसें ठसाठस भरकर चली। अकेले 10 फरवरी को ही निगम को 17 लाख की आय हुई। 11 फरवरी को कितनी आय हुई इसका पता बाहरी राज्यों को गई बसों के लौटने के बाद चलेगा।
कोरोनाकाल में अनलॉक होने के बाद यात्री रोडवेज की बसों से किनारा करते हुए नजर आ रहे हैं। कहीं भी आने जाने के लिए या तो निजी वाहनों का इस्तेमाल कर रहे हैं या फिर टैक्सी का। कुंभ मेले से परिवहन निगम ने आस लगा रखी थी। निगम को उम्मीद थी कि स्नान पर्वों के दौरान आय में बढ़ोत्तरी होगी। लेकिन कोरोना के चलते किए गए कड़े नियमों के कारण बाहरी राज्यों से ज्यादा यात्री नहीं आए और इसका असर रोडवेज पर पड़ा।
14 जनवरी को मकर संक्रांति, 11 फरवरी को मौनी अमावस्या, 16 फरवरी बसंत पंचमी और 27 फरवरी माघ पूर्णिमा के स्नान पर्व के लिए रोडवेज की तैयारियां धरी की धरी रह गई। इसके बाद 11 मार्च को महाशिवरात्रि स्नान पर भी तैयारियां की गई थी। गुरुवार को गंगा स्नान करने के बाद शाम को छह बजे से वापस लौटने वाले श्रद्धालुुओं की भीड़ बस अड्डों पर पहुंची तो अधिकारियों के चेहरे खिल उठे। उन्होंने बसों का संचालन कराया। हरिद्वार डिपो की करीब 80 बसें शाम होते ही सड़कों पर उतर आई और यात्रियों को उनके गंतव्य की तरफ लेकर रवाना हुई।
महाशिवरात्रि पर्व पर हरिद्वार डिपो को बेहतर आय मिली है। 10 फरवरी को करीब 17 लाख रुपये की आय हुई है जबकि 11 फरवरी की शाम को गई बसों के वापस आने पर ही उनकी आय का पता चल पाएगा।
- प्रतीक जैन, एआरएम, हरिद्वार डिपो