मसूरी में अभी निर्माण पर पूरी तरह प्रतिबंध है। शहर की मौजूदा स्थिति को देखते हुए वहां विस्तार और नए निर्माण की संभावना भी नहीं है। इसके कारण वहां के स्थानीय लोगों और व्यवसायियों को खासी परेशानी झेलनी पड़ती है। रोपवे निर्माण के दौरान कई नए निर्माण होंगे, जिससे अन्य लोगों के लिए भी राह खुल सकती है। स्थानीय लोग लंबे समय से निर्माण पर लगी रोक हटाने की मांग कर रहे हैं।
मसूरी में कम होगा ट्रैफिक का दबाव
रोपवे शुरू होने से मसूरी में ट्रैफिक का दबाव निश्चित तौर पर कुछ कम होगा। हालांकि मसूरी रोड से पुरकुल के बीच ट्रैफिक बहुत अधिक बढ़ जाएगा। योजना के अनुसार, पर्यटकों के वाहन रोपवे के पास मल्टीस्टोरी पार्किंग में खड़े कर दिए जाएंगे। यहां से पर्यटक रोपवे के जरिये लाइब्रेरी चौक मसूरी पहुंचेंगे। यहां पर उनके लिए इलेक्ट्रिक कार्ट उपलब्ध रहेगी, जिसकी मदद से वो पहाड़ों की रानी घूम सकेंगे। यात्री वाहनों की तादाद कम होने से मसूरी में पर्यटन सीजन के दौरान अक्सर लगने वाले जाम से भी निजात मिल सकेगी।
दून-मसूरी के बीच बनेगा एशिया का दूसरा सबसे लंबा रोपवे
देहरादून और मसूरी के बीच बनने वाला यह रोपवे (5.6 किमी) एशिया में दूसरा सबसे लंबा होगा। यह हांगकांग के गोंगपिंग 360 (5.7 किमी) से महज सौ मीटर ही छोटा है। अभी एशिया में दूसरा सबसे लंबा रोपवे जोशीमठ-औली है, जिसकी लंबाई 4.15 किमी है। इसके अलावा गुजरात के गिरनार में 2.3 किमी, असम में ब्रह्मपुत्र नदी के ऊपर 1.8 किमी और हिमाचल के धर्मशाला में 1.75 किमी लंबाई के रोपवे हैं या उनका निर्माण चल रहा है।
देहरादून और मसूरी के बीच बनने जा रहा रोपवे अपनी कई खूबियों के लिए पर्यटकों को लुभाएगा। एक ओर यह दुनिया का पांचवां सबसे लंबा रोपवे है तो दूसरी ओर इसका सफर करने के लिए यात्रियों को ज्यादा लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा।
देहरादून मसूरी रोपवे बहुप्रतीक्षित है। कई सालों से इसकी कवायद चल रही है। रोपवे के लिए मसूरी के शिफन कोर्ट से बड़े स्तर पर अतिक्रमण हटाया जा चुका है। इसकी राह का सबसे बड़ा रोड़ा आईटीबीपी की जमीन थी, जिस पर अब केंद्र सरकार ने अड़चन खत्म कर दी है। जानकारी के मुताबिक, यह रोपवे इतना शक्तिशाली होगा कि इसमें एक घंटे के भीतर दोनों ओर से एक हजार यात्री सफर कर सकेंगे।
यानी इस रोपवे की ढुलाई क्षमता दोनों दिशाओं से 1000 यात्री प्रति घंटा होगी। इससे देहरादून और मसूरी के बीच सड़क मार्ग पर होने वाले यातायात में काफी कमी आएगी। लोग बिना ट्रैफिक जाम में फंसे हवाई सफर करते हुए देहरादून से मसूरी और मसूरी से देहरादून आ-जा सकेंगे। प्रोजेक्ट पूरा होने पर यह रोप-वे पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र होगा। इससे उत्तराखंड में पर्यटन उद्योग को बढ़ावा मिलेगा।
क्या होता है रोपवे, किसने किया आविष्कार?
रोपवे यानी स्पष्ट है कि रस्सी के सहारे यात्रा का मार्ग। इसमें एक मजबूत हवाई केबल पर स्थिर इंजन या इलेक्ट्रिक मोटर द्वारा संचालित होता है। इसका उपयोग यात्री और माल, दोनों तरह के परिवहन के लिए किया जाता है। केबल परिवहन की खोज 16 मार्च 1836 को लंदन में जन्में एंड्रयू स्मिथ हेलीडाई ने वर्ष 1873 में की थी।
पार्किंग का झंझट भी होगा खत्म
केंद्र व राज्य सरकार के इस बहुप्रतिक्षित रोपवे से पार्किंग का झंझट भी खत्म होगा। एक ओर जहां पुरकुल गांव में मल्टीलेवल पार्किंग तैयार की जाएगी तो दूसरी ओर मसूरी में भी इसके लिए मल्टीलेवल पार्किंग होगी। मसूरी में वैसे भी हर साल पार्किंग की सबसे ज्यादा समस्या होती है। रोपवे की मल्टीलेवल पार्किंग से बड़ी राहत मिलेगी।