रिजर्व बैंक आफ इंडिया ने क्लीन नोट पालिसी के तहत जीओ जारी कर ऐसे नोटों को बैंकों को लौटाने का हुकुम जारी कर या है, जिन पर कुछ-न-कुछ लिखा है। लेकिन यह कवायद बेहद मुश्किल होने वाली है।
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बैंकों में हर रोज तकरीबन ढाई हजार नोट कुछ-न-कुछ लिखे पहुंचते हैं। खुद क्लेरिकल स्टाफ कई दफा नोटों की काउंटिंग करने के बाद गड्डी पर उनकी संख्या लिखता है।
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जानकारों के मुताबिक पहले चरण में केवल वही नोट आउट होंगे, जिन पर कोई धार्मिक चिन्ह लिखा हो यानी जिनसे आपसी सौहार्द्र को किसी तरह का खतरा हो या अन्य कोई आपत्तिजनक बात उन पर लिखी सामने आई हो।
स्विट्जरलैंड से आता है पेपर
नोट बनाने का पेपर यूरोप, खास तौर पर स्विट्जरलैंड से आता है। इसकी प्रिंटिंग हिंदुस्तान में होती है। इसकी खूबी यह है कि यह पानी में आसानी से खराब नहीं होता, दूसरे कई दफा ट्रांजेक्शन के बावजूद इसमें जल्दी कोई खराबी देखने को नहीं मिलती।
जिन नोटों पर कुछ-न-कुछ लिखा है, ऐसे नोट आरबीआई को भेजे जाएंगे। अब क्योंकि ऐसे नोट चलन से बाहर करने हैं तो सामान्य रूप से उन्हें नष्ट ही किया जाएगा।
- अशोक अनेजा, मंडल प्रमुख पीएनबी
क्लीन नोट पालिसी पहले से चल रही है। इसके तहत नोट पर कुछ लिखना, उन्हें स्टेपल करना, किसी तरह इंप्रेशन लगाना प्रतिबंधित है। लेकिन बैंक में इस तरह केहजारों नोट आते हैं। चलते हैं। यही आगे भी रहेगा।
- एमएस रावत, कैशियर, भारतीय स्टेट बैंक
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