आपदा के बाद पहाड़ और घाटी की आबो-हवा में वायरल संक्रमण तेज हो रहा है। लोगों को तेज बुखार के साथ सिरदर्द और पेट दर्द हो रहा है। इसके बाद स्थिति गंभीर हो जाती है। कर्णप्रयाग की रहने वाली भंसारी देवी की हालत बिगड़ गई। परिजन उन्हें दून अस्पताल लाए जहां डाक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
कुछ देर के बाद हालत बिगड़ी
परिजनों ने बताया कि उनकी तबियत अच्छी-खासी रही है। मंगलवार को भंसारी देवी को तेज बुखार आया और सिर दर्द शुरु हो गया। इसके कुछ देर के बाद हालत बिगड़ गई। इसी तरह शनिवार को चमोली के शमशेर को श्रीनगर अस्पताल से दून भेजा गया था। उसे बुखार आया और अचानक खून की उल्टियां होने लगी थीं। आपदा प्रभावित क्षेत्रों और घाटी में डायरिया के भी केस मिल रहे हैं।
चकराता, त्युनी और अन्य क्षेत्रों में डायरिया फैला हुआ है। मुख्य चिकित्साधिकारी डा. एएस सेंगर ने बताया कि जहां-जहां डायरिया रोगी की सूचना मिली थी। स्वास्थ्यकर्मियों की टीमें भेज दी गई हैं।
आपदाग्रस्त क्षेत्रों से लौटे डा. विमिलेश जोशी ने बताया कि बारिश की वजह से वहां लोगों को जुकाम-बुखार और सांस फूलने की दिक्कत हो रही थी। ग्लोबल हाइजीन काउंसिल ने उत्तराखंड में अतिरिक्त स्वच्छता बरतने की अपील की है।
यहां बांटी क्लोरीन की गोलियां
बारिश शुरु होने के बाद से घाटी में डायरिया का प्रकोप बना हुआ है। जबसे रोगी आने शुरु हुए हैं, स्वास्थ्य विभाग क्लोरीन की टेबलेट बांटने का दावा कर रहा है। लेकिन टेबलेट कहां बांटी जा रही हैं। यह पता नहीं है। दून अस्पताल और कोरोनेशन में आ रहे मरीजों का कहना है कि उन्हें क्लोरीन की टेबलेट नहीं दी गई।
डायरिया के रोगी नेहरु कालोनी, हर्रावाला, माजरा, मेहूवाला समेत एक दर्जन क्षेत्रों में हैं। मुख्य चिकित्साधिकारी डा. एएस सेंगर ने बताया कि एक महीने में क्लोरीन की पांच लाख टेबलेट वितरित की गई हैं।