सरकार के इस फैसले से इन सरकारी कर्मचारियों की बल्ले-बल्ले हो जाएगी। सरकार ने उन्हें सौगात दी है जिससे उन्हें बड़ा फायदा होगा।
वित्त विभाग ने विभागों, उपक्रमों, स्वायत्तशासी निकायों में तैनात उन समस्त कर्मचारियों के लिए महंगाई भत्ते की किस्त को मंजूरी दे दी है, जो पांचवें व छठे वेतनमान ले रहे हैं। साथ ही जिन सिविल एवं पारिवारिक पेंशनरों का वेतनमान का पुनरीक्षण नहीं हुआ है, उन्हें भी महंगाई भत्ते की सौगात दी गई है।
प्रमुख सचिव वित्त राधा रतूड़ी ने मंगलवार को इस बारे में अलग-अलग शासनादेश जारी किए। जारी शासनादेश के अनुसार छठे केंद्रीय वेतनमान का लाभ ले रहे कार्मिकों को एक जुलाई 2017 से महंगाई भत्ता देय होगा।
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इसके साथ ही उनके मूल वेतन पर महंगाई भत्ते की दर 139 फीसदी हो जाएगी। इससे पूर्व एक जनवरी 2017 को उनके लिए 136 प्रतिशत का महंगाई भत्ता स्वीकृत किया गया था। ये लाभ उन कर्मचारियों को मिलेगा जिनका वेतन सातवें वेतन आयोग की संस्तुतियों के क्रम में पुनरीक्षित नहीं किया गया है।
सरकार ने पांचवे वेतनमान ले रहे कर्मियों के महंगाई भत्ते की दर को 264 फीसदी से बढ़ाकर 268 फीसदी कर दिया है। जारी शासनादेशों के मुताबिक, सेवानिवृत्त व छह माह में सेवानिवृत होने वाले कर्मियों को छोड़कर बाकी सभी कर्मचारियों को एक जुलाई से 31 अक्तूबर की अवधि की महंगाई भत्ते की राशि उनके भविष्य निधि खाते में जमा हो जाएगी।
एक नवंबर से उन्हें डीए का नकद भुगतान होगा। अवशेष एरियर में से 10 प्रतिशत पेंशन अंशदान तथा उतनी ही राशि नियोक्ता के अंश से पेंशन खाते में जमा होगी। वित्त विभाग ने पांचवें वेतनमान के सभी सिविल व पारिवारिक पेंशनरों को भी महंगाई राहत का लाभ देने को मंजूरी दी है, जिनकी पेंशन पुनरीक्षित नहीं हुई है।
राज्यपाल ने पूर्व दरों को अतिक्रमित करते हुए एक जुलाई 2017 से इसे 264 प्रतिशत से बढ़ाकर 268 प्रतिशत करने को मंजूरी दी है। इसी तरह छठे वेतनमान के उन सभी सिविल व पारिवारिक पेंशनरों की महंगाई राहत को 136 प्रतिशत से बढ़ाकर 139 प्रतिशत किया गया है, जिनकी पेंशन पुनरीक्षित नहीं हो सकी है।
प्राविधिक शिक्षक के अधीन राज्य निधि से सहायता प्राप्त शिक्षण संस्थाओं के शैक्षिक व शिक्षणेत्तर पेंशनरों को भी इसका लाभ मिलेगा। इस संबंध में उच्च न्यायालय के न्यायाधीशों, लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष तथा सदस्यों, स्थानीय निकायों व सार्वजनिक उपक्रमों के सिविल व पारिवारिक पेंशनरों के लिए शासन अलग से शासनादेश जारी करेगा।