राजधानी देहरादून के डीएवी पी कॉलेज के एक गुरुजी ने हाल ही में रेस्टोरेंट बिजनेस की दुनिया में कदम रखा है। रेस्त्रां में खाने वालों की संख्या, पकाए जाने वाले खाने की तुलना में काफी कम होती है।
इस नाते हर शाम को गोभी, आलू, मटर ही नहीं बल्कि चिकेन व मटन भी बचा रह जाता है। खराब होने पर फेंकने के बजाए गुरुजी को नया आइडिया सूझा। रेस्त्रां मालिक गुरुजी ने कालेज के साथी गुरुजनों को बासी खाना निपटाने का जरिया बना लिया।
अब वह साथी शिक्षकों को हर शाम डीनर पर आमंत्रित करते हैं। सब मिलकर खाते हैं लेकिन शुक्र है अभी तक किसी भी शिक्षक का पेट खराब नहीं हुआ। बासी खाने का यह डीनर इतना मशहूर हो गया कि कालेज के शिक्षकों में होड़ सी मची है।