सूचना का अधिकार अधिनियम एक ओर आम आदमी के लिए भ्रष्टाचार के विरुद्ध जंग का बड़ा हथियार बनकर उभरा है, वहीं सरकारी विभागों ने इसका भी तोड़ तलाश लिया है।
जानकारी वक्त पर नहीं
सूचना मांगने वाले को इस कदर परेशान किया जा रहा है कि वह थककर हारकर मान जाए। मुख्यालय स्तर की सूचनाएं हर जिले को फारवर्ड की जा रही हैं, वहां से भी जानकारी वक्त पर नहीं मिल रही। आवेदक आगे अपील करे तो उसे हर जिले में सुनवाई के लिए दौड़ना पड़ेगा। खेल यहीं नहीं थमता।
विभाग सुनवाई की जानकारी का पत्र कई दिन तक लटकाए रखते हैं। बाद में पत्र इस तरह भेजा जाता है कि वह अपीलकर्ता के पास सुनवाई से ऐन पहले पहुंचे। ऐसे में अपीलकर्ता चाहकर भी सुनवाई में मौजूदगी दर्ज नहीं करा पाता। ऐसे में सुनवाई एकपक्षीय हो जाती है, जिसका लाभ संबंधित अधिकारी उठाते हैं।
एक दिन में कैसे पहुंचें बागेश्वर
ऐसा ही एक मामला है दून निवासी अधिवक्ता सुयश कुकरेती का। सुयश ने खाद्य एवं आपूर्ति आयुक्त कार्यालय से कुछ जानकारियां मांगीं। आयुक्त कार्यालय ने खुद जानकारी देने के बजाय इसे समस्त खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति कार्यालयों को हस्तांतरित कर दिया। बागेश्वर जनपद से स्पष्ट सूचना नहीं मिली तो सुयश ने प्रथम अपील की।
प्रथम विभागीय अपीलीय अधिकारी ने 23 अगस्त को सुबह 11 बजे सुनवाई की तारीख दी। अधिकारी ने छह अगस्त को पत्र जारी किया, जो 16 अगस्त को पोस्ट किया गया। यह पत्र 22 अगस्त को सुयश को मिला। दून से बागेश्वर जाने में कम से कम दो दिन का वक्त लगता है। ऐसे में सुयश सुनवाई में जाकर अपना पक्ष नहीं रख सके।