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देश की धरोहरों में शामिल होगा आपका डीएवी

Thu, 11 Dec 2014 06:31 PM IST
प्रवेश कुमारी/अमर उजाला, देहरादून
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अगर सब कुछ योजना मुताबिक हुआ तो देहरादून का डीएवी कॉलेज पुरातात्विक धरोहरों में शुमार किया जाएगा। 114 साल के इतिहास को संजोने में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) तकनीकी सहायता प्रदान करेगा, जबकि केंद्रीय लोक निर्माण विभाग यानी सीपीडब्लूडी निर्माण, मरम्मत के कार्य को अंजाम देगा।
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विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) की उच्च शिक्षण संस्थानों में 100 साल से भी पुरानी इमारतों को संरक्षित करने की स्कीम के तहत कॉलेज के संबंध में प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। इसे तीन माह के भीतर यूजीसी को भेज दिया जाएगा।

एएसआई ने किया निरीक्षण
इस संबंध में एएसआई की एक टीम कॉलेज का निरीक्षण भी कर चुकी है। उसके सुझावों के आधार पर यूजीसी से धरोहर ग्रांट हासिल करने के लिए 5 करोड़ रुपये  के कार्य प्रस्ताव में शामिल किए गए हैं।
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कॉलेज के कई विभागों की इमारतें जिस हाल में है, उन्हें सहेजने की बहुत जरूरत है। खास तौर पर कालेज परिसर में पीछे की तरफ बने वनस्पति विभाग और जंतु विज्ञान विभाग की इमारतों का हाल बेहद खराब है।

इनका है कहना-
मैंने खुद जाकर कॉलेज का जायजा लिया था। बाटनी डिपार्टमेंट के तरफ की इमारत में काफी कुछ बदलाव चाहिए। एएसआई इमारतों के ढांचे से जुड़े सुझाव देगा। बाकी काम सीपीडब्लूडी को करना है।
-अतुल भार्गव, अधीक्षण पुरातत्वविद्, एएसआई (दून सर्किल)।

यूजीसी की इस स्कीम से ऐसी शिक्षण संस्थाओं का इतिहास भी सुरक्षित रहेगा, जो 100 साल से अधिक समय से उच्च शिक्षा के क्षेत्र में सेवारत हैं। इसके लिए हम प्रस्ताव तैयार करा रहे हैं। काफी काम हो चुका है।  
-डा. देवेंद्र भसीन, प्राचार्य, डीएवी पीजी कॉलेज।

यह है कॉलेज का इतिहास...
दयानंद एंग्लो वैदिक शिक्षण संस्थानों के क्रम में 1911 में डीएवी पाठशाला बनी। कक्षाएं इससे पहले चलनी शुरू हो गई थीं। 1922 में डीएवी इंटर कॉलेज के रूप में उच्चीकृत हुआ। 1946 में स्नातक कक्षाएं शुरू हुईं, जबकि 1948 में यह कक्षाएं स्नातकोत्तर में उच्चीकृत हुईं।
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