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आपदा के बाद ऐसे चल रही है पहाड़ की गाड़ी

Wed, 08 Jan 2014 11:36 AM IST
सुधाकर भट्ट/ अमर उजाला, देहरादून
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सरपीली सड़क ऐसी कि कलेजा मुंह में आ आए और आप जिस जीप से सफर कर रहे हों उसका चालक नौसिखिया हो, तो डर लगना स्वाभाविक है।
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लोगों के प्रति सहानुभूति
लेकिन सब कुछ जानते हुए भी उत्तराखंड के लोग इस जीप से सफर कर रहे हैं तो शायद इसलिए कि एक ओर ये उनकी मजबूरी है तो दूसरी तरफ आपदा से टूट चुके लोगों के प्रति सहानुभूति।

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क्योंकि उन्हें अंधेरा होने से पहले अपने घर भी पहुंचना है और उस चालक की जीप में सफर करने से वे मना भी कैसे करें जिस पर अपने पिता को केदार की आपदा में खोने के बाद से पूरे परिवार की जिम्मेदारी आ पड़ी हो।
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ऊखीमठ से चौमासी तक के रास्ते के इस दृश्य पर शायद ही कोई यकीन करे। खतरनाक सरपीली सड़क, नवयुवक चालक और उस पर भरोसा कर सफर करने वाले लोग यह जताने के लिए काफी हैं कि आपदा ने पहाड़ की जिंदगी को पूरी तरह बदल कर रख दिया है।

परिवार का बोझ
इस जीप का नवयुवक (चालक) बीए कर रहा था। जीप इससे पहले इसके पिता चलाया करते थे। केदार आपदा में पिता को खो चुके इस नवयुवक पर घर संभालने की पूरी जिम्मेदारी आ गई। मां और बहनों का बोझ उस पर आ पड़ा।

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उसके मामा ने दो महीने की छुट्टी लेकर उसे जीप चलाना सिखाया। तब से यह नवयुवक खतरनाक पहाड़ी रास्ते पर गाड़ी चला रहा है। चौमासी के राय सिंह भी इस जीप में बैठे हैं और उन्हें पता है कि अभी इस चालक को ढंग से गाड़ी चलानी नहीं आती।
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पर आपदा से साथ-साथ जूझने का जज्बा ही है जो उन्हें यह हिम्मत देता है कि जीप में बैठे रहें और चौकन्ने रहें। पहाड़ के लोगों के इसी जज्बे को देखकर मैं भी चुपचाप जीप में ही बैठ आगे का सफर करता रहा।
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