उत्तराखंड में भाजपा के क्लीन स्विप के बाद अब हरीश रावत के लिए अपनी सरकार बचाना मुश्किल हो रहा है। करारी हार और गैर भाजपा शासित राज्यों की सरकारों पर बढ़े दबाव के बीच मुख्यमंत्री हरीश रावत डैमेज कंट्रोल में जुटे हैं।
इस क्रम राज्य सरकार ने रविवार को अपने कई विधायकों को कैबिनेट मंत्री का दर्जा दिया। ये वहीं विधायक हैं जो लगातार रावत सरकार के लिए खतरा बने हुए थे।
इन विधायकों में से कई सतपाल महाराज के खेमे के विधायक हैं। इन विधायकों में नव प्रभात, प्रणव चैंपियन, राजेंद्र भंडारी, अनुसूया प्रसाद मैखुरी, नारायण राम आर्य, मदन बिष्ट, हरिदास, सुदंरलाल मंद्रवाल, सरबत करीम अंसारी आदी शामिल हैं।
उठने लगी पीर, चलने लगे बयानों के तीर
वहीं हार की पीर के चलते एक बार फिर कांग्रेस के बड़े नेताओं के बीच बयानों के तीर चलने लगे हैं।
मुख्यमंत्री हरीश रावत पर विजय बहुगुणा गुट की ओर से मंत्री अमृता रावत की जगह किसी अन्य का मंत्री बनाने का भी दबाव बनाया जा रहा है।
शनिवार को मुख्यमंत्री ने अपने दो मंत्रियों इंदिरा ह्दयेश और सहयोगी प्रीतम सिंह पंवार को संतुष्ट करने की कोशिश की।
मुख्यमंत्री ने वरिष्ठ मंत्री इंदिरा ह़दयेश को एक बार फिर करीब लाने के लिए अपने विभागों में से औद्योगिक विकास विभाग सौंप दिया है।
हालांकि इसी के अंतर्गत आने वाले खनन को अपने पास ही रखा है। जबकि आवास विभाग प्रीतम सिंह पंवार को आवंटित किया है।
अमृता रावत को मंत्री पद से हटाने की मांग
नतीजों की अगली सुबह से ही कांग्रेस के बड़े नेताओं के बीच मंथन और अगली रणनीति पर काम शुरू हो गया है।
पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा, मंत्री हरक सिंह, इंदिरा ह़दयेश और प्रीतम सिंह बारी-बारी मुख्यमंत्री से मिलने पहुंचे।
बताते हैं कि बहुगुणा खेमे के नेता अमृता रावत को मंत्री पद से हटाने और उनकी जगह किसी अन्य को मंत्री बनाने की मांग कर रहे हैं।
अमृता को हटाने के बाद बढ़ेगी मुसीबत
हालांकि मुख्यमंत्री अगर अमृता रावत को हटाते हैं तो मुसीबत और बढ़नी है। विजय बहुगुणा के सबसे निकट एक विधायक को मंत्री बनवाने की पैरवी भी शुरू हो गई है।
जबकि सरकार का सहयोग दे रहे निर्दलीय दिनेश धनै लंबे समय से मंत्री बनने को तैयार बैठे हैं। शाम को विधायक सुबोध उन्नियाल भी मुख्यमंत्री से मिलने सचिवालय पहुंचे।
पर्यटन मंत्री, अमृता रावत
मैं क्यूं किसी के कहने पर इस्तीफा दूं या पार्टी छोड़ू। चुनाव में हार की बात है तो नैतिकता केआधार पर सभी को इस्तीफा दे देना चाहिए। हरक सिंह रावत की तो बड़ी हार हुई है। प्रदेश की कांग्रेस सरकार स्थिर है।
भाजपा ने हरीश रावत से मांगा इस्तीफा
प्रदेश भाजपा ने लोकसभा चुनाव में हुई हार, आपदाग्रस्त इलाकों में विकास नहीं और चार धाम यात्रा की बदइंतजामी पर मुख्यमंत्री हरीश रावत से इस्तीफा मांगा है।
भाजपा ने आपदा के लिए केंद्र से मिले 640 करोड़ रुपए के लिए श्वेतपत्र जारी करने की मांग भी की।
प्रदेश अध्यक्ष तीरथ सिंह रावत ने शनिवार को मीडिया से कहा जिस तरह पिछले चुनाव में भाजपा के पांचों सीटें खोने पर पूर्व मुख्यमंत्री भुवन चंद्र खंडूरी ने इस्तीफे की पेशकश की थी उसी तरह हरीश रावत को भी नैतिकता के आधार पर इस्तीफा देना चाहिए।
उनका कहना है कि उत्तराखंड में जब कांग्रेस हरीश रावत बनाम मोदी चुनाव लड़ रही थी तो साफ है कि मुख्यमंत्री की जमीन खिसक गई है।
एक सवाल के जवाब में प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि भाजपा किसी सरकार को अस्थिर नहीं करने जा रही है लेकिन प्रदेश सरकार अपने कर्मों से जाएगी। प्रदेश नेता आपस में लड़ रहे हैं और एक दूसरे की कुर्सी हिला रहे हैं।