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इंसानों की तरह पक्षी भी होते हैं धोखेबाज

Sun, 17 Aug 2014 05:01 PM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, हरिद्वार
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वैसे तो बुजुर्गों से मिली जानकारी से सब जानते हैं कि पक्षियों में सबसे चालाक माने जाने वाले कौए को मीठी बोली वाली कोयल लंबे समय तक बेवकूफ बनाती है।
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पहली बार दुनिया वैज्ञानिक तथ्यों के साथ जानेगी कि कोयल घोंसला बनाने और बच्चे पालने की मेहनत नहीं करती। इसके लिए वह कौए के अंडों को भी खत्म कर डालती है।

गुरुकुल कांगड़ी विश्वविद्यालय के जंतु एवं पर्यावरण विज्ञान के प्रोफेसर और जाने माने पक्षी विज्ञानी डा. दिनेश भट्ट और डा. विनय सेठी ने लगातार दो साल तक अध्ययन के बाद यह निष्कर्ष निकाला।
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कौए के 47 घोंसलों का रात दिन अध्ययन किया

डा. सेठी ने बताया कि ‘ब्रूड पैराशिटिज्म’ विषय पर जापान के टोक्यो शहर में होने वाली इंटरनेशनल कॉफ्रेंस में वह अपने शोध को प्रस्तुत करेंगे। यह कॉफ्रेंस शनिवार से शुरू होकर 20 अगस्त तक चलेगी।

उन्होंने बताया कि अपने प्रयोग के लिए उन्होंने जगजीतपुर और भेल के कई स्थानों को चुना। कौए के 47 घोंसलों का रात दिन अध्ययन किया गया। जिससे सामने आया कि मादा कौआ अपने घोंसले में अंडे देकर सेने के लिए बैठती है।

नर और मादा कोयल इस पर नजर रखते हैं। जैसे ही मादा कौआ अकेली होती है तो नर कोयल बड़ी चालाकी से उसको तंग कर अपना पीछा करने को मजबूर करता है।
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अपनी मां के साथ फुर्र हो जाते हैं बच्चे

मादा कौए के दूर जाते ही मादा कोयल तुरंत उनके घोंसले में बैठकर अंडे दे देती है और कौए के अंडों को चोंच में लेकर दूर फेंक देती है।

मादा कोयल यह काम पूरा करने के बाद खास आवाज में संकेत देती है जिससे नर कोयल वहां से ओझल हो जाता है। इसके बाद अनजान मादा कौआ ही कोयल के अंडों को अपना मान सेती है और बच्चे निकलने पर खाना खिलाती है।

कोयल का बच्चा जन्म से ही चालाक होता है। खाना कौए से खाता है पर घोंसले के आसपास मंडराने वाली अपनी मां से संवाद कायम रखता है और उड़ने लायक होते ही अपनी मां के साथ फुर्र हो जाता है। कौए बेचारे देखते रह जाते हैं।
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