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रणवीर से पहले भी उत्तराखंड पुलिस पर लगे हैं दाग

Tue, 10 Jun 2014 08:46 AM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
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अमर उजाला, देहरादून
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रणवीर एनकाउंटर में 17 पुलिसकर्मियों को सजा सुनाए जाने के बाद उत्तराखंड पुलिस का नाम देशभर में चर्चाओं में है। लेकिन मित्र पुलिस की खाकी पर यह पहला बदनुमा दाग नहीं था।

इससे पहले पुलिस की गोलियों की शिकार बनी थी रुड़की के एक कारोबारी की पत्नी।

वर्ष 2006 में रुड़की के एक कारोबारी परिवार समेत घूमने के लिए ऋषिकेश जा रहे थे।

पहले ही पुलिस ने बिछाया था जाल

कारसवार परिवार को मालूम नहीं था कि ऋषिकेश से चंद किलोमीटर पहले ही पुलिस जाल बिछाए हुए है।

जबकि पुलिस को सूचना थी कि कार में शराब तस्कर हैं। रुड़की के परिवार के मोड़ पर पहुंचते ही पुलिस ने गोलियां चलानी शुरू कर दीं।

गोली लगने से कारोबारी की पत्नी मनीषा की मौत हो गई थी। इस मामले में एक हेड कांस्टेबल और दो सिपाहियों को सजा सुनाई गई थी।

यहां बाल-बाल बची पु‌लिस

गत वर्ष दून जेल में बंद अजय बरसाती की मौत हो गई थी। अजय को पुलिस ने टप्पेबाजी के आरोप में गिरफ्तार किया था।

इस मामले में पुलिस पर मारपीट को लेकर सवाल उठे थे। सीबीआई जांच भी हुई, लेकिन क्लोजर रिपोर्ट लगा दी गई। पुलिसकर्मी बच गए।

कुछ ऐसा ही मामला, तीन माह पूर्व आया। डालनवाला पुलिस ने चेन लूट के आरोप में रायपुर के ऋषिनगर निवासी रजनीश को उठाया था। हिरासत में उसकी मौत हो गई। लेकिन, यहां रजनीश का नशेड़ी होना ढाल बन गया।

चार और एनकाउंटर

दून जिला पुलिस ने वर्ष 2006 में चेन लूट के मामले में संदिग्ध माने गए तीन युवकों और एक किशोर का भी एनकाउंटर कर डाला था।

22 वर्षीय रामदर्शी, 20 साल के जितेंद्र को 24 अगस्त 2006 को दून में पुलिस ने मार गिराया था।

उनके दो साथी श्याम सुंदर (18) और परविंदर (16) अगले दिन पुलिस की गोलियों का शिकार बने। लेकिन इन मामलों में परिजनों के कमजोर होने से पुलिस हावी रही।
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अब गायब हुआ एनकाउंटर शब्द

उत्तराखंड पुलिस की डिक्शनरी से एनकाउंटर शब्द ही गायब हो गया है।

रणवीर मामले में पुलिस इस कदर घिरी कि इसके बाद से आज तक पुलिस ने अपराधियों के खिलाफ भी हथियार उठाने की हिम्मत नहीं जुटाई है।

अब तो किसी अपराधी के पकड़े जाने पर स्वास्थ्य खराब होने या नशे की हालत में होने पर पुलिस तुरंत अस्पताल में भर्ती करा देती है।

साफ है कि 17 पुलिसकर्मियों को सजा के बाद पुलिस कोई रिस्क नहीं लेना चाहती।
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