रुड़की बम धमाके के मामले के खुलासे में 336 घंटे मददगार साबित हो सकते हैं। घटनास्थल के पास लगे दो सीसीटीवी कैमरों में सात दिन (336 घंटे) की पूरी रिकॉर्डिंग है। पुलिस ने यह डाटा लेकर जांच शुरू कर दी है।
हालांकि, अब तक खंगाली गई दो दिन की एक-एक सेकेंड की पूरी फुटेज में कोई खास सुराग नहीं मिला है। लेकिन, बाकी पांच दिन की फुटेज में कोई सबूत मिलने की पुलिस को उम्मीद है।
रुड़की बम विस्फोट मामले में पुलिस के साथ इंटेलीजेंस की टीमों ने भी साजिश के तारों को जोड़ने के पूरी ताकत झोंक रखी है। बिजनौर में 12 सितंबर को विस्फोट के बाद फरार हुए सिमी के तीन संदिग्ध आतंकियों के उत्तराखंड में छिपने की संभावनाएं ज्यादा थी।
हालांकि सूबे की खुफिया एजेंसियां इसे नकारती रही हैं, लेकिन रुड़की में बम विस्फोट के बाद इस बात को बल मिला है। सूत्रों के मुताबिक पुलिस ने इस मामले में जिन छह लोगों को संदिग्ध माना है, उनमें एक फरार आतंकी भी है। रुड़की से काफी समय पूर्व भी एक आतंकी की गिरफ्तारी हुई थी। ऐसे में पुलिस और खुफिया एजेंसियां फूंक-फूंककर कदम रख रही हैं।